मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आज प्रशासनिक एवं पुलिस सेवा में नव पदस्थापित अधिकारियों ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों को नई जिम्मेदारियों के लिए शुभकामनाएं देते हुए निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जनहित, सुशासन और वि
19 अप्रैल रविवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन पश्चिम बंगाल के झारग्राम में आयोजित एक चुनावी सभा में शामिल नहीं हो पाए। इस घटना को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है,
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज पश्चिम बंगाल के चुनावा को लेकर पुरुलिया जिले के काशीपुर, मानबाजार और बांधवान विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाओं को संबोधित किया। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की।
हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया के जरिए ट्वीट कर सीबीएसई 10वीं परीक्षा में सफलता प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं बधाई दी
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन आज दिवंगत जेएन सिंह, राज्य सरकार के अवकाश प्राप्त अधिकारी के निधन पर आयोजित संस्कार भोज में शामिल हुए।
सोशल मीडिया पर जारी पोस्ट में सीएम हेमंत सोरेन ने कहा है कि हूल और बिरसा उलगुलान की आवाज बुलंद करने वाला आदिवासी समुदाय आज अपनी मान्यता और सम्मान के लिए संघर्ष कर रहा है। असम विधानसभा चुनाव से पहले इस पोस्ट ने सियासी हलचल पैदा कर दी है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज झारखंड, रांची लौट आये हैं। लगभग एक सप्ताह असम विधानसभा चुनाव प्रचार में व्यस्त कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रांची लौटे हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज असम में मां कामाख्या के दर्शन किये हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीर भी साझा की है। सीएम हेमंत ने दर्शन के बाद कहा कि असम में मां कामाख्या के पावन धाम में आज पूजा-अर्चना कर सभी के सुख, समृद्धि, शांति, उत्तम स्वास्थ्य,
असम विधानसभा चुनाव में झामुमो प्रत्याशियों का प्रचार करने गये सीएम हेमंत सोरेन को सभा स्थल पर जाने से रोका गया। उन्होंने खेत में खड़े होकर मोबाइल से जनसभा को संबोधित किया।
हेमंत सोरेन ने रविवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक भावुक और तीखा बयान जारी करते हुए कहा कि असम के चाय बागानों में पीढ़ियों से रह रहे आदिवासी समाज के साथ गंभीर अन्याय हुआ है। उन्होंने इसे सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर का अन्याय बताया।
हेमंत सोरेन ने रविवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक भावुक और तीखा बयान जारी करते हुए कहा कि असम के चाय बागानों में पीढ़ियों से रह रहे आदिवासी समाज के साथ गंभीर अन्याय हुआ है। उन्होंने इसे सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर का अन्याय बताया।
बीते कई पीढ़ियों से असम के चाय बागानों में निवास करने वाले झारखंड से विस्थापित आदिवासियों को एसटी दर्जा नहीं मिला. उन्होंने इसे राष्ट्रीय अन्याय कहा है.