सीमित संसाधनों और सख्त दिनचर्या के बीच पढ़ाई का संतुलन बनाते हुए जयपुरा की शिप्रा प्रधान ने मैट्रिक परीक्षा में 97.60 प्रतिशत अंक हासिल कर पूर्वी सिंहभूम जिले में दूसरा स्थान प्राप्त किया है।
सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, बहरागोड़ा के छात्र ओम ने कुल 500 में से 492 अंक अर्जित किए। ओम कुमार ने संस्कृत और गणित में 99-99 अंक, विज्ञान में 98, अंग्रेजी में 97 और हिंदी में 92 अंक हासिल किए हैं।
गोड्डा के 100 फीसदी दिव्यांग छात्र फैजानउल्लाह ने मुंह से लिखकर मैट्रिक बोर्ड परीक्षा में 93.8 फीसदी अंक हासिल किए हैं। झारखंड के 25 साल के इतिहास में फैजान पहले दिव्यांग हैं जिन्होंने यह कारनामा कर दिखाया है।
JAC ने आज 10वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम जारी कर दिया है, जिसमें रांची के सन्नी वर्मा ने पूरे राज्य में टॉप कर इतिहास रच दिया है। सन्नी ने 99.60 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं
जैक की 10वीं बोर्ड परीक्षा में हजारीबाग की 5 बेटियों ने टॉप-3 में जगह बनाई है। सभी बच्चियां हजारीबाग के इंदिरा गांधी बालिका उच्च विद्यालय की छात्रा हैं। प्रियांशु कुमारी 99.60 फीसदी अंक लाकर स्टेट टॉपर बनी हैं।
राज्य के तीन जिलों रांची, लोहरदगा और गुमला में शिक्षा के जरिये सामाजिक बदलाव की मौन क्रांति हो रही है। यह शिक्षा के जरिये सामाजिक परिवर्तन लाने की कहानी तो है ही, गांवों के उत्थान और देशज संस्कृति के पुनर्जागरण की भी कहानी है।
कठिन संघर्ष के बीच से हम प्राय: जीत हासिल करने की कहानियां सुनते रहते हैं। ऐसी ही एक और मिसाल सामने आयी है।
स्कूल प्रिंसिपल ने अपने स्कूल के छात्रों की मदद के लिए 1 करोड़ रुपये क्राउड फंडिंग से जुटा लिए। इन पैसो से ऐसे छात्रों की फीस भरी गई ,जिनके अभिभावकों का काम छूट गया और वे अपने बच्चो की स्कूल फीस देने में असमर्थ हो गए
जूनून और संघर्ष करने का जज्बा हो तो क्या कुछ हासिल नहीं किया जा सकता। इसी कथन की पुष्टि कर रही हैं JNU की छात्रा रही सरिता माली। सरिता माली का चयन अमेरिका की कैलिफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी में हुआ है। अब वो JNU से Ph.D करने के बाद अमेरिका जाएगी
राज्य निदेशक हनी सिन्हा ने सफल प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं तथा भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों का हौसला बढ़ाया।
कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों' कवि दुष्यंत की इन पंक्तियों को गुनी गांव के लोक प्रेरक दीदियों और ग्रामीणों ने चरितार्थ कर दिखाया है। झारखंड की राजधानी रांची से 30 कि.मी. दूर खूंटी जिले के कर्रा प्रखंड में घुन्स
आज के स्वावलंबी युवा कल के नवप्रवर्तक, निर्माता और नेतृत्वकर्ता हैं। गोद लिए हुए गांवों की महिलाओं एवं युवाओं को स्वावलंबी बनाने की दिशा में मेकॉन सतत प्रयासरत है I इस दिशा में मेकॉन इन गांवों के लोगों के लिए सिलाई-कढाई, पढाई एवम अन्य कार्यों में प्रशिक्ष