द फॉलोअप डेस्क
विधानसभा चुनाव के लिए असम में प्रवास कर रहे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने टी-ट्राइब्स को एसटी दर्जा दिलाने का संकल्प दोहराया है. हेमंत सोरेन ने कहा कि असम की धरती पर ऐसा सच दबा दिया गया है, जिसे जितना कहा जाए, उतना कम है. सीएम हेमंत ने फिर दोहराया कि बीते कई पीढ़ियों से असम के चाय बागानों में निवास करने वाले झारखंड से विस्थापित आदिवासियों को एसटी दर्जा नहीं मिला. उन्होंने इसे राष्ट्रीय अन्याय कहा है. उन्होंने कहा कि इस अन्याय को इतिहास कभी माफ नहीं करेगा. गौरतलब है कि सीएम हेमंत की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने 21 सीटों पर स्थानीय उम्मीदवारों को पार्टी का सिंबल दिया था, जिनमें से 18 प्रत्याशी अब मैदान में हैं. यहां संताल आदिवासी समुदाय की बड़ी आबादी निवास करती है.
साथियों,
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) April 5, 2026
असम की धरती पर एक ऐसा सच दबा दिया गया है, जिसे जितना कहा जाए, सबको बताया जाए, उतना कम है।
असम के चाय बागानों में पीढ़ियों से रह रहे आदिवासी समाज को आज तक ST का संवैधानिक दर्जा नहीं मिला।
यह सामान्य चूक नहीं है, यह राष्ट्रीय स्तर का अन्याय है… एक ऐसा अन्याय, जिसे…
नेतृत्व बदला पर तकदीर नहीं
सीएम हेमंत ने कहा कि जिन लोगों को उनके घरों से दूर लाकर इस मिट्टी से बांध दिया, जिन्होंने अपने खून-पसीने से असम की अर्थव्यवस्था खड़ी की, उन्हीं को आज तक उनके अस्तित्व की मान्यता नहीं दी गई. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद दशकों तक सरकारें बदलती रही, नेतृत्व बदला लेकिन समाज का दर्द वही रहा.
पूरे समाज को अधिकार से वंचित रखा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि बड़े वादों वाले राजनेताओं ने आदिवासियों के हक के मुद्दे को अपनी प्राथमिकता नहीं बनाया. सत्ता में बैठी पार्टियों ने मेनिफेस्टो में इस मुद्दे को जगह नहीं दी. उन्होंने सवाल किया कि पूरे समाज को संवैधानिक अधिकार से वंचित क्यों रखा गया है. उन्होंने कहा कि मुद्दा राजनीति से ऊपर है.