logo

वोटिंग करवायेंगे, लेकिन नहीं दे पायेंगे वोट; बंगाल SIR लिस्ट से 65 चुनाव अधिकारियों के नाम भी हटाये गये 

VOTER01.jpg

द फॉलोअप डेस्क 

प बंगाल में जारी SIR लिस्ट से उन 65 चुनाव अधिकारियों के नाम भी हटा दिये गये हैं, जो चुनावी ड्यूटी पर हैं। ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। यह जानकारी तब सार्वजनिक हुई जब  इलेक्शन कमीशन के रोल में बदलाव के आदेश के बाद 90.8 लाख लोगों के नाम हटाए गए। इसमें 65 चुनाव अधिकारियों के भी नाम शामिल हैं, जो चुनावी ड्यूटी पर हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बहस के दौरान, इस महीने लगभग 27.1 लाख पुरुषों और महिलाओं के लिए वैसा ही जवाब दिया जैसा उसने पहले भी दिया था। इस बीच चुनाव अधिकारियों के लिस्ट से उनके नाम हटाए जाने के मामले की सुनवाई हुई। इन चुनाव अधिकारियो को अपीलेट ट्रिब्यूनल के पास भेजा गया और बताया गया कि वे भी इस बार वोट नहीं दे पायेंगे। 

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने 

इस पर सीनियर एडवोकेट एमआर शमशाद ने दुख भरी अपील की। उन्होंने कोर्ट को बताया "ये 65 याचिकाकर्ता हैं जो इलेक्शन ड्यूटी पर हैं उनके ड्यूटी ऑर्डर में EPIC (वोटर ID) नंबर लिखे हैं। लेकिन अब वे नंबर हटा दिए गए हैं। अब यह चुनाव कराने वाले लोग वोट नहीं दे सकते! यह मनमानी है, कई लोगों को कारण नहीं बताए गए।" इसके जवाब में चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, " चुनाव अधिकारी अपीलेट ट्रिब्यूनल के सामने ये दलीलें रखें।"

रिकॉर्ड 92.8 परसेंट वोटिंग हुई

बता दें कि बंगाल चुनाव का पहला फेज़ गुरुवार को हुआ और कागज़ों पर रिकॉर्ड 92.8 परसेंट वोटिंग हुई। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्टेट रोल से 90.8 लाख वोटर्स के नाम हटाने से बेसलाइन गड़बड़ा गई और वोटिंग परसेंटेज बढ़ गया। साथ ही, इस आंकड़े को टीएमसी और भाजपा अपने-अपने समर्थन में हुआ मतदान बता रहे हैं। कुछ जानकारों का मानना है कि एसआईआर की वजह से पैदा हुए खौफ ने लोगों को पोलिंग बूथ तक खींचा। लोग अधिक संख्या में इसलिए मतदान केंद्रों तक गये क्योंकि उन्हें लगा कि ये वोटर लिस्ट में नाम बनाये रखने का सुरक्षित तरीका है।  


 

Tags - election duty unable to vote election officials  removed W Bengal  SIR