कुछ दिनों पहले कॉमेडियन नजर मोहम्मद की हत्या तालिबानियों ने कर दी थी।
खलीली अल रहमान हक्कानी वो शख्स है, जिसके सिर पर अमरीका ने 9 फरवरी 2011 को पचास लाख डॉलर का इनाम रखा था।
तालिबान के कब्जे के बाद यह दूसरी बार काबुल पर हुआ आतंकी हमला
तालिबान के साथ जिन तत्वों का उठना-बैठना है, चीन और पाकिस्तान अंदर ही अंदर सशंकित हैं
दुनिया की बदसूरती से डर लगता हो तो एक दिलरुबा हमेशा अपने भीतर रखिये
भारत सरकार की अफगान नीति पर हमारे सभी राजनीतिक दल और विदेश नीति के विशेषज्ञ काफी चिंतित
सचमुच ऐसा लग रहा है कि तालिबानी हुकूमत से पूरी दुनिया पर आतंकवाद का कहर टूट पड़ेगा।
तालिबान को क्या, अमेरिकियों को भी इल्म नहीं था कि अफगान-सेना इतनी जल्दी धराशायी हो जाएगी
अफगानिस्तान को बर्बाद करके यह विमर्श पीछे छोड़ जाती हैं कि 'अमेरिका कैसे और क्यों हारा?' "तालिबान ने साम्राज्यवाद को कैसे हरा दिया?"
अफगानिस्तान पर तालिबानियों के कब्जे के बाद वहां के हालात को देखकर भारत सरकार अपने नागरिकों को निकालने में जुटी हुई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह कथन प्रशंसनीय है कि अफगानिस्तान के हिंदू और सिख तथा अफगान भाई-बहनों का भारत में स्वागत है।
मानव जाति के विकास या सिर्फ अस्तित्व में भी बने रहने का केवल एक ही विकल्प है वो है प्रगतिशील बने रहना।