द फॉलोअप टीम, रांची :
झारखंड में बच्चों को दोपहर में स्कूल के समय में फूड पैकेट देने की व्यवस्था है, जिसे अब रद्द करने का फैसला लिया गया है। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को फूड पैकेट के बदले पैसे देने का ही निर्णय लिया गया है। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण द्वारा मंगलवार को इस संबंध में पत्र जारी कर दिया गया। पत्र में कहा गया है कि टेंडर को तत्काल प्रभाव से पूर्णत: रद्द किया गया है।
मिली जानकारी के मुताबिक बच्चों को 1 अक्तूबर 2020 से 31 मार्च 2020 तक कुल 134 दिनों का भुगतान किया जाएगा। इसके लिए 28 सितंबर को टेंडर जारी किया गया था। टेंडर को लेकर प्रक्रिया भी शुरू हो गयी थी, लेकिन बाद में किसी कारण से यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

32 लाख को मिलता है मिड-डे-मिल
कक्षा एक से आठ तक के लगभग 32 लाख बच्चों को मध्याह्न भोजन दिया जाता है। इसके तहत चावल के अलावा कक्षा एक से पांच तक के बच्चों के लिए 4.97 रुपये व कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को 7.45 रुपये कुकिंग कॉस्ट दी जाती है। कुकिंग कॉस्ट के तहत दाल, नमक, तेल, मसाला, सब्जी की राशि दी जाती है। इन सामग्री का पैकेट बना कर राज्य के सरकारी स्कूल के बच्चों को देने का निर्णय लिया गया था।
लगभग दो साल से बंद है भोजन
जब से कोरोना का संक्रमण शुरू हुआ है तब से बच्चों के स्कूल ठीक से नही चल रहे है। इसलिे मार्च 2020 से स्कूलों में मध्याह्न भोजन बनना बंद है। इसलिए फैसला लिया गया था कि बच्चों को सभी सामग्री का पैकेट ही दे दिया जाये। शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों में मध्याह्न भोजन बनाने की अनुमति देने को लेकर प्रस्ताव आपदा प्रबंधन विभाग को भेजा गया है। आपदा प्रबंधन विभाग से अनुमति मिलने के बाद स्कूलों में बच्चों को फिर से मध्याह्न भोजन दिया जायेगा। लेकिन जब तक सहमति नही बनती है तब तक निर्णय लिया गया है कि बच्चों को 134 दिनों का फूड कॉस्ट ही दिया जाय़े