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सभी बेरोजगारों को नहीं मिलेगा भत्ता! जानिये, मुख्यमंत्री प्रोत्साहन राशि में क्या झोल है?

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द फॉलोअप टीम, रांची: 
2019 के विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपने निश्चय पत्र में वादा किया था कि नौकरी मिलने तक राज्य के सभी युवा बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता दिया जायेगा। झामुमो ने अपने निश्चय पत्र में स्प्ष्ट शब्दों में कहा था कि सभी बेरोजगार ग्रेजुएट को 5000 रुपये और पोस्ट ग्रेजुएट बेरोजगार युवा को 7000 हजार रुपये बतौर बेरोजगारी भत्ता दिया जायेगा।

भाजपा ने उठाया सवाल 
12 मार्च को हेमंत कैबिनेट की बैठक में इस पर मुहर भी लगा दी गयी लेकिन, सरकार ने इसमें खेल कर दिया है ऐसा भारतीय जनता पार्टी का कहना है। बीजेपी प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झारखंड मुक्ति मोर्चा द्वारा निश्चय पत्र में किये गये दावे और हेमंत सरकार की घोषणा पर सवाल उठाया है। ये पूरा मामला क्या है ये जान लेते हैं। 

सवाल योग्यता निर्धारण को लेकर
सरकार ने इस योजना को मुख्यंमत्री प्रोत्साहन राशि योजना नाम दिया। इसके क्रियान्वयन के लिये एक पत्र भी जारी किया। इस पत्र में बेरोजगारी भत्ता को लेकर जो योग्यता निर्धारित की गयी है, सवाल उसी को लेकर है। सरकार ने बेरोजगारी भत्ता को लेकर जो योग्यता निर्धारित की है, उसका सीधा मतलब ये है कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी युवाओं को योजना का लाभ नहीं देगी बल्कि योजना का लाभ केवल उन्हीं युवा बेरोजगारों को मिलेगा जिन्होंने ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन के साथ किसी भी तरह का कौशल अथवा व्यवसायिक प्रशिक्षण लिया हो। 

जानिए! कौन सी अहर्ता पूरी करनी होगी
राज्य सरकार के निर्देश के मुताबिक जिन युवाओं ने विभिन्न विभागों द्वारा आयोजित कौशल प्रशिक्षण के तहत अल्पकालीन प्रशिक्षण लिया होगा, सरकारी आईआईटी या पॉलिटेक्निक अथवा सरकार द्वारा संचालित किसी व्यवसायिक पाठ्यक्रम को पूरा करके उत्तीर्ण किया होगा उन्हें ही इस योजना का लाभ दिया जायेगा। 

सरकार ने बेरोजगारों के साथ छल किया! 
सरकार ने मुख्यमंत्री प्रोत्साहन राशि योजना के लिये जो योग्यता अथवा अहर्ता निर्धारित की है, उसे झारखंड मुक्ति मोर्चा के चुनावी निश्चय पत्र से तुलना करें तो ये बेरोजगारों के साथ किया गया छलावा लगेगा। सरकार के मुताबिक आवेदक पूरी तरह बेरोजगार होना चाहिये। वो किसी भी सार्वजनिक अथवा निजी क्षेत्र, संस्थान अथवा उपक्रम का हिस्सा नहीं होना चाहिये और ना ही उसके पास स्वरोजगार होना चाहिये। योग्यता के अंतर्गत जो पाठ्यक्रम तय किये गये हैं जैसे की आईआईटी, पॉलिटेक्निक अथवा अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण, आवेदक के पास उसका सर्टिफिकेट होना चाहिये। 

आवेदक झारखंड के नियोजनालय से निबंधित होना चाहिये
आवेदक झारखंड के नियोजनालय से निबंधित होना चाहिये। योजना का लाभ लेने में दोहरीकरण नहीं होना चाहिये। झारखंड का स्थायी निवासी होना चाहिये। आवेदक के पास खुद का बैंक खाता और आधार कार्ड होना चाहिये। आवेदक किसी भी ऐसे अपराध में अभियुक्त नहीं होना चाहिये जिसकी वजह से उसे 48 घंटे अथवा उससे ज्यादा समय के लिये जेल की सजा हुई हो। आवेदक की न्यूनतम आयु सीमा 18 साल और अधिकतम आयुसीमा 35 साल होनी चाहिये। बीजेपी ने इसे छलावा बताया है। 

निश्चय पत्र की बातों का क्या हुआ! 
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने इस पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि ये प्रदेश के युवाओं के साथ छलावा है। सरकार ने उन्हें धोखा दिया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने निश्चय पत्र में कहा था कि सभी बेरोजगारों को रोजगार देगी लेकिन अब कह रही है कि प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार दिया जायेगा। जाहिर है कि इसकी वजह से युवाओं की एक बड़ी संख्या इस योजना के लाभ से वंचित रह जायेगी। सरकार वैकेंसी निकाल नहीं रही। नियोजन नीति को रद्द कर दिया। पुरानी तमाम वैकेंसियां कैंसिल कर दी गयीं। व्यवसायिक शिक्षा की स्थिति बदतर है। ऐसे में सरकार ने शर्तें लाद कर बेरोजगारों को छलने का काम किया है।