द फॉलोअप डेस्क
शरीर पर कीचड़ पोतकर तालाब में खड़ी महिलाओं ने कहा, हम नक्सली बन जाएंगे। ये मामला मध्य प्रदेश के छतरपुर का है। जहां 'केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट' और 'रूंझ-मझगुआ बांध' से प्रभावित आदिवासी परिवार पिछले 11 दिनों से लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। सैकड़ों आदिवासी महिलाएं एक साथ मिलकर 'पंचतत्व आंदोलन' नाम से एक सांकेतिक विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। लेकिन सरकार इनकी नहीं सुन रही है। न ही मीडिया में इस खबर को बहुत महत्व दिया जा रहा है।

"हमारे जंगल, ज़मीन और घर छीने जा रहे हैं"
इस दौरान पत्रकारों से बात करते हुए एक आदिवासी महिला प्रदर्शनकारी ने कहा, हमारे जंगल, ज़मीन और घर छीने जा रहे हैं, इसलिए हमें विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर होना पड़ा है। आज 11वां दिन है, और अभी तक कोई भी सरकारी अधिकारी हमसे मिलने नहीं आया है। जब तक हमारी गांग पूरी नहीं हो जातीं, हम यहां से नहीं हटेंगे। अगर सरकार हमारी अनदेखी करती रही, तो हम नक्सली भी बन सकते हैं, और हथियार भी उठा सकते हैं। दुर्गा या काली की तरह, हम भी उग्र रूप धारण कर सकते हैं। हमारे बच्चे डर के साए में जी रहे हैं, लेकिन सरकार को इस बात की कोई परवाह नहीं है कि हमारे घरों के अंदर क्या हो रहा है।"
