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World economic forum : गेहूं-चीनी के निर्यात को सीमित करने पर बोले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, बताया जरूरी कदम  

गेहूं-चीनी के निर्यात को सीमित करने पर बोले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, बताया जरूरी कदम  

डेस्क :
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत द्वारा गेहूं -चीनी के निर्यात को सीमित करने का बचाव किया है। पीयूष गोयल ने दावोस में चल रहे एक सम्मेलन के दौरान गेहूं और चीनी के निर्यात को सीमित करने के पीछे का कारण घरेलू मांग को बताया है। उन्होंने ने कहा कि भारत हरित क्रांति शुरू होने से पहले आनाज का आयत करता था। पिछले दो सालो से हमने गेहूं का निर्यात शुरू किया था ,वो भी बेहद काम मात्रा में। भारत के द्वारा अधिकांश गेंहू गरीब देशों में निर्यात किया जाता है। दुर्भाग्यवश बीते साल जलवायु की समस्या हुई और इस वजह से गेहूं का उत्पादन तेज़ी से घट गया। हमें अपने देश के लिए ही अपने खाद्य सुरक्षा से रिज़र्व गेंहू निकलना पड़ा।

 

गेहू के निर्यात के साथ बिचौलियों पर ध्यान देने की जरूरत 
वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम की सालाना बैठक के दौरान वैश्विक कारोबार को लेकर चल रहे एक सेशन में गोयल ने कहा कि गेहू निर्यात पर बैन लगाने से बहुत सी अफ़वाहें फैल रही हैं। सेशन के बाद पियूष गोयल ने वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइज़ेशन (डब्ल्यूटीओ) के चीफ़ से भी अलग से मुलाकात की। 

भारत किन देशो को करता है ज्यादा गेहूं का निर्यात 
भारत की मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉमर्स के मुताबिक भारत बांग्लादेश ,नेपाल ,यूएई ,श्रीलंका,यमन ,अफगानिस्तान, क़तर ,इंडोनिसिया,ओमान और मलेशिया को सबसे ज्यादा गेहूं की सप्लाई करता है। इस बार गेहू की कम पैदावार का कारण जलवायु परिवर्तन है।