द फॉलोअप डेस्क:
महिला आरक्षण संशोधन बिल लोकसभा में गिर गया। 2 दिन तक चली लंबी बहस के बाद 17 अप्रैल की शाम को महिला आरक्षण बिल अथवा 131वें संविधान संशोधन विधेयक पर वोटिंग कराई गई। बिल के पक्ष में 298 सांसदों ने मतदान किया, जबकि 230 सांसदों ने विरोध में वोटिंग की। वोटिंग प्रक्रिया में कुल 528 सांसदों ने हिस्सा लिया था। दरअसल, लोकसभा में सांसदों की संख्या के हिसाब से इस बिल को पारित कराने के दो-तिहाई यानी 352 वोट की जरूरत थी, जो नहीं मिल सका। दरअसल, किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। इस बिल को 293 सांसदों का समर्थन हासिल था। हालांकि, इससे पांच वोट ज्यादा मिले, लेकिन विपक्षी एकजुटता की वजह से महिला आरक्षण बिल गिर गया।

जेडीयू ने बिल पास नहीं होने पर जताई नाराजगी
जेडीयू ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल गिरने पर निराशा जताई है. पार्टी के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि संविधान संशोधन के लिए सरकार को दो तिहाई बहुमत चाहिए था, जो नहीं मिला। उन्होंने कहा कि डॉ. राममनोहर लोहिया ने राजनीति में महिलाओं की समान भागीदारी का जो सपना देखा था, आज उसपर राजनीतिक वज्रपात हुआ है। नीरज कुमार ने कहा कि अंबेडकर ने महिलाओं को वोटिंग का अधिकार दिया, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने लंबे समय तक महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी नहीं दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने महिला आरक्षण बिल को पास कराने के सर्वदलीय सहमति बनाने की पहल की थी, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। जेडीयू प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी चाहते हैं कि केवल उनकी मां और बहन सदन में पहुंच जाए, जबकि नीतीश कुमार ने एक आम किसान महिला को विधानमंडल तक पहुंचाया था। उन्होंने कहा कि आज जो संसद में महिला विरोधी कृत्य हुआ है, उसका विपक्ष को राजनीतिक श्राप लगेगा।