तृणमूल कांग्रेस के आरोपों पर केंद्रीय चुनाव आयोग ने जवाब दिया है. आयोग के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल पर लिखा है कि इस बार पश्चिम बंगाल में भय, हिंसा, धमकी, प्रलोभन, छापा, बूथ कैप्चरिंग और सोर्स-जैमिंग से मुक्त चुनाव होगा. दरअसल, विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण के संदर्भ में मतदाताओं का नाम काटने का आरोप तृणमूल कांग्रेस की ओर से लगाया जा रहा है. टीएमसी एसआईआर की प्रक्रिया की शुरुआत से ही चुनाव आयोग पर हमलावर है और संस्था पर केंद्र की मोदी सरकार के हाथों कॉम्प्रोमाइज होने का आरोप लगाती आई है.
चुनाव आयोग की तृणमूल कांग्रेस को दो टूक
— Election Commission of India (@ECISVEEP) April 8, 2026
पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव:
भय रहित,
हिंसा रहित,
धमकी रहित,
प्रलोभन रहित,
छापा रहित,
बूथ एवं सोर्स जामिंग रहित होकर ही रहेंगे
ECI's Straight-talk to Trinamool Congress
This time, the Elections in West Bengal would surely be :… pic.twitter.com/p5fM8Uu337
चुनाव आयोग के मौजूदा ट्वीट को उसी संदर्भ में देखा जा रहा है. चुनाव आयोग के इस ट्वीट को लेकर चर्चा काफी तेज हो गई, क्योंकि किसी संवैधानिक संस्था ने कभी किसी पॉलिटिकल पार्टी पर ऐसे कटाक्ष नहीं किया.
टीएमसी के चुनाव आयोग पर कई आरोप
गौरतलब है कि बंगाल विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और सत्ताधारी दल टीएमसी के बीच माना जा रहा है. टीएमसी प्रमुख मुख्यमंत्री ममता बनर्जी यह आरोप लगाती हैं कि चुनाव आयोग बीजेपी के इशारे पर काम करता है. बंगाल में एसआईआर के खिलाफ ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख भी किया था. उन्होंने केस की पैरवी भी खुद की थी. दिल्ली में भी करीब 2 दिन तक इस मुद्दे पर गतिरोध की स्थिति रही थी.
बंगाल में भी ममता बनर्जी ने विशेष मतदाता पुनरीक्षण के खिलाफ रैलियां निकालीं. ममता बनर्जी यह भी आरोप लगाती हैं कि बीजेपी के इशारे पर चुनाव आयोग ने प्रदेश में बड़े पैमाने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का तबादला किया है.
चुनाव आयोग के ट्वीट पर शुरू हुआ बवाल
चुनाव आयोग ने संभवत इन्हीं आरोपों का जवाब दिया है, लेकिन ट्वीट की भाषा को देख लोगों को हैरत हो रही है. इससे पहले चुनाव आयोग ने कभी इतने आक्रामक ढंग से पार्टी विशेष का नाम लिए बगैर इतना तीखा कटाक्ष नहीं किया. इसे राजनीतिक बयान की तरह देखा जा रहा है.
टीएमसी की ओर से चुनाव आयोग के ट्वीट पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है.