द फॉलोअप डेस्क
उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा में जारी मज़दूरों के प्रदर्शन के बीच मज़दूरी बढ़ाने का ऐलान तो किया है, लेकिन कारोबारी और कारखानों के मालिक इसे बोझ बता रहे हैं। ऐसे में बढी हुई मजदूरी, क्या सच में मजदूरों की जेब तक पहुंचेगी, इस पर संशय होने लगा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या हर एम्प्लॉयर ज़्यादा पैसे दे पाएगा? इस इलाके के गारमेंट कारोबारियों के मुताबिक, बढ़ती लागत और कम होते मुनाफ़े की वजह से, इस बढ़ोतरी को झेल पाना मुश्किल है। यह चिंता नोएडा के कारखानों में चल रही मज़दूरों की अशांति के बीच पैदा हुई है, जिसने प्रोडक्शन के समय और भविष्य के एक्सपोर्ट ऑर्डर पर अनिश्चितता पैदा करना शुरू कर दिया है। एक्सपोर्टरों ने कहा कि ग्लोबल खरीदार इस स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं; उनमें से कई तो पहले से ही यह साफ़ जानना चाह रहे हैं कि क्या शिपमेंट में देरी होगी।

कारखानों के मालिक जाएंगे सरकार के पास
नोएडा के गारमेंट कारोबारी कहते हैं, "बढ़ती इनपुट लागत के साथ, एक्सपोर्टरों के लिए बढ़ी हुई मज़दूरी का भुगतान करना मुश्किल होगा।" उन्होंने बताया, "हमारा मुनाफ़ा पहले से ही दबाव में है और खरीदार कपड़ों की कीमतें कम करने के लिए फिर से बातचीत कर रहे हैं। अगर हम उनकी बात नहीं मानते, तो वे अपने ऑर्डर बांग्लादेश, कंबोडिया या वियतनाम भेज देंगे।" उन्होंने आगे कहा कि एसोसिएशन शुक्रवार को राज्य सरकार के सामने इस मुद्दे को उठाने वाला है।

सरकार ने कितनी बढ़ाई मजदूरी
रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने 1 अप्रैल से लागू नए मज़दूरी ढांचे में करीब 21% तक बढ़ोतरी की है, जिसे मजदूर पहले ही कम बता रहे हैं। बहरहाल, रिपोर्ट के मुताबिक, अकुशल मजदूरों का न्यूनतम मासिक वेतन 13,690 रुपये, अर्ध-कुशल का 15,059 रुपये और कुशल मजदूरों का 16,868 रुपये तय किया गया है। वहीं अन्य नगर निगम क्षेत्रों में यह वेतन क्रमशः 13,006, 14,306 और 16,025 रुपये है, जबकि बाकी जिलों में अकुशल मजदूरों के लिए 12,356 रुपये, अर्ध-कुशल के लिए 13,591 रुपये और कुशल मजदूरों के लिए 15,224 रुपये निर्धारित किए गए हैं। मजदूर इसे मानने के लिए तैयार नहीं हैं।

10 लाख मजदूर करते हैं काम
गौरतलब है कि नोएडा क्लस्टर के कारखानों में 800,000 से 10 लाख तक कर्मचारी काम करते हैं। इस साल इन कारखानों से लगभग 50,000 करोड़ रुपये के कपड़े निर्यात किये गये। एक अन्य कारोबारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि लगातार हो रही रुकावटों के कारण ग्लोबल खरीदार अपने ऑर्डर बांग्लादेश और वियतनाम जैसे दूसरे मैन्युफैक्चरिंग सेंटर्स में भेज सकते हैं। हमारे पास सभी बड़े ग्लोबल ब्रांड्स से सवाल पूछे जा रहे हैं कि क्या कर्मचारियों के असंतोष के कारण डिलीवरी में देरी होगी। कारोबारियों ने ने कुछ और बड़ी चुनौतियों की ओर भी इशारा किया, जिनमें कच्चे माल की बढ़ती कीमतें, माल ढुलाई की दरों में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल मांग में कमी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन कारणों से उनके पास मज़दूरी की अतिरिक्त लागत को उठाने की गुंजाइश बहुत कम बची है।
सरकार आंदोलन को मान रही साजिश
इस बीच, उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा है कि नोएडा में हुई अशांति साजिश का परिणाम है। मजदूरों के प्रदर्शन को अर्बन नक्सल तक से जोड़ा जा रहा है। पुलिस इसकी जांच कर रही है। बुधवार को जारी एक बयान में सरकार ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और आगजनी भड़काने में "बाहरी तत्वों" ने अहम भूमिका निभाई। सरकार ने आगे कहा कि अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करके उस "सोची-समझी साज़िश" को नाकाम कर दिया, जिसे मज़दूर आंदोलन की आड़ में अंजाम दिया जा रहा था।
