द फॉलोअप डेस्क
केंद्र सरकार ने मंगलवार को तीन विधेयक सार्वजनिक किए हैं, जिनसे नवीनतम जनगणना के आधार पर नए परिसीमन (Delimitation) का रास्ता साफ हो जायेगा। साथ ही लोकसभा में सीटों वर्तमान संख्या 545 से बढ़ाकर संभावित रूप से 850 तक हो सकती है। वहीं, संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण को लागू किया जा सकेगा। सरकार ने संविधान में संशोधन के संभावित कदम से पहले सांसदों के साथ बिल का ड्राफ़्ट साझा किया है। इस कदम से लंबे समय से अटके महिलाओं के लिए आरक्षण कानून को लागू करने और साथ ही नए सिरे से सीटों के परिसीमन का रास्ता साफ़ होगा।

ड्राफ़्ट बिल सांसदों के साथ साझा किया गया
सूत्रों के मुताबिक, सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा एक ड्राफ़्ट बिल सांसदों के साथ साझा किया गया है। सरकार संसद के तीन दिन के विशेष सत्र के दौरान संविधान में कुछ अहम संशोधन करने की योजना बना रही है। यह विशेष सत्र संसद और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फ़ीसदी आरक्षण से जुड़े प्रावधानों में संशोधन करने और 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का परिसीमन करने के लिए बुलाया गया है। सीटों की संख्या बढ़ाने का मकसद सीटों का नए सिरे से परिसीमन करके आरक्षण को ज़्यादा आसानी से लागू करना है। इस प्रस्ताव के तहत, 815 सीटें राज्यों को और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों को मिलेंगी, जिससे कुल सीटों की संख्या 850 हो जाएगी। उम्मीद है कि ये बदलाव 2029 के लोकसभा चुनावों से लागू होंगे।

क्या है विपक्ष में बैठे दलों की चिंता
विपक्ष सरकार के परिसीमन के कदम को चुनौती देने की तैयारी कर रहा है, खासकर 2011 की जनगणना के आंकड़ों के इस्तेमाल को लेकर। AAP, RJD और DMK जैसी पार्टियों का तर्क है कि यह प्रक्रिया 2021 की जनगणना के नए आंकड़ों पर आधारित होनी चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, INDIA गठबंधन की कई पार्टियां पिछड़े वर्गों की महिलाओं के लिए "आरक्षण के अंदर आरक्षण" की पुरानी मांग पर भी सरकार से स्पष्टीकरण मांग सकती हैं।
विपक्षी नेताओं और AAP समेत उनके सहयोगियों की एक रणनीति बैठक दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर होनी है। इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस और DMK के नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। ये दोनों पार्टियां चुनाव वाले राज्यों पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में सत्ता में हैं।

कैसे होगा आंकड़ों का खेल
तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रस्तावित संशोधन महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने के बजाय सीटों के परिसीमन पर ज़्यादा केंद्रित हैं। "संवैधानिक संशोधन बिलों पर 16 अप्रैल को चर्चा होनी है। बिल की कॉपी कहाँ है?" उन्होंने पूछा, और साथ ही सत्र के समय पर भी सवाल उठाया, जिसे 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले बुलाया गया है।
उन्होंने कहा कि संवैधानिक संशोधनों को पास कराने के लिए BJP को विपक्ष के समर्थन की ज़रूरत होगी, क्योंकि इसके लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। विपक्षी गठबंधन अपनी मांगों को आगे बढ़ाने और सरकार से ज़्यादा स्पष्टता हासिल करने के लिए इसी शर्त पर निर्भर है।
