डेस्क:
महंगाई का म बोलने को तैयार नहीं हो रही केंद्र सरकार ने आखिरकार बता दिया है कि देश में महंगाई कितनी बढ़ी है। सोमवार को भारत सरकार ने बताया कि मार्च 2021 में मुद्रास्फीति यानी महंगाई की दर 7.89 फीसदी थी। मार्च 2022 तक यानी 1 साल में ये बढ़कर 14.55 फीसदी हो गई। मतलब 1 साल में ही महंगाई की दर बढ़कर दोगुनी हो गई।

रूस और यूक्रेन युद्ध को बताया जिम्मेदार
केंद्र सरकार ने कहा कि मार्च 2022 तक मुद्रास्फीति (महंगाई) की उच्च दर का मुख्य कारण यूक्रेन-रूस का संघर्ष रहा। भारत सरकार ने बताया कि रूस और यूक्रेन के बीच बीते 55 दिनों से जारी सामरिक संघर्ष की वजह से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान आया है। इसकी वजह से पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, खनिज जेल तथा मूल धातुओं की कीमत में वृद्धि दर्ज की गई है।
हालिया विधानसभा चुनाव के बाद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि दर्ज की गई है। देश के अधिकांश शहरों में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत प्रति लीटर 100 रुपये के पार पहुंची है।
The annual rate of inflation is 14.55% (Provisional) for the month of March as compared to 7.89% in March 2021: Government of India
— ANI (@ANI) April 18, 2022
रसोई गैस की कीमतों में ऐतिहासिक वृद्धि
घरेलु रसोई गैस की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। बीते दिनों रसोई गैस की कीमतों में कम से कम 250 रुपये का इजाफा किया गया। इसने मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है। खाद्य तेल की कीमतें भी ऐतिहासिक ऊंचाई पर है। सब्जी सहित अन्य खाद्य पदार्थ भी महंगे हुए हैं। 2 दिन पहले ही सुधा दूध की कीमतों में प्रति लीटर 2 रुपये का इजाफा किया गया। बढ़ती महंगाई से जनता त्रस्त है। गौरतलब है कि नवंबर 2021 से मार्च 2022 में चुनाव परिणाम आने तक पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत में बढ़ोत्तरी नहीं की गई थी। चुनाव खत्म होते ही पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छूने लगे।
जीएसटी काउंसिल की बैठक में अहम फैसला
इधर विपक्ष लगातार महंगाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साध रहा है। कांग्रेस महंगाई मुक्त भारत अभियान चला रही है। अलग-अलग प्रदेशों में आंदोलन किया जा रहा है। इस बीच जानकारी मिली है कि आने वाले कुछ दिनों में जीएसटी काउंसिल की अहम बैठक होगी। इस बैठक में टैक्स स्लेब में कुछ बदलाव किया जा सकता है। कहा जा रहा है कि 5 फीसदी जीएसटी स्लैब में आने वाले उत्पादों को 7 या 8 फीसदी स्लैब में तब्दील किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि इससे राजस्व बढ़ेगा।
वहीं 5 फीसदी स्लैब में शामिल कुछ उत्पादों को जिसमें से अधिकांश ज्यादा खपत वाले खाद्य तथा घरेलु उपयोग वाले सामान हैं, इन्हें 3 फीसदी जीएसटी वाले स्लैब में डाला जा सकता है।