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गैस संकट से मुंबई के होटल उद्योग पर खतरा, कमर्शियल LPG कमी से 2000 रेस्तरां बंद

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मुंबई
पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और वैश्विक आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी का असर अब देश के बड़े शहरों के होटल उद्योग पर दिखने लगा है। मुंबई में छोटे और मंझोले आकार के लगभग 20 प्रतिशत रेस्तरां बंद हो चुके हैं। होटल उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि यदि आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो दो दिनों के भीतर शहर के करीब 50 प्रतिशत होटल और रेस्तरां भी बंद हो सकते हैं।
होटल उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के अनुसार, घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति फिलहाल सामान्य बताई जा रही है, लेकिन कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की भारी कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसी कारण कई होटल और रेस्तरां सीमित संसाधनों के साथ काम करने को मजबूर हैं।


Federation of Hotel and Restaurant Associations of India के उपाध्यक्ष और पश्चिम जोन के प्रवक्ता प्रदीप शेट्टी का कहना है कि कई भारतीय शहरों में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कमी देखी जा रही है। उन्होंने बताया कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के 5 मार्च के नोटिफिकेशन के बाद आपूर्ति और वितरकों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है, जिसके कारण कई जगहों पर होटल और रेस्तरां को सिलेंडर की आपूर्ति बाधित हो गई है।
उन्होंने बताया कि मुंबई, पुणे, औरंगाबाद और नागपुर जैसे शहरों से गंभीर कमी की रिपोर्ट मिल रही है, जबकि दिल्ली, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी आपूर्ति प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। यदि अगले दो दिनों में हालात नहीं सुधरे तो मौजूदा स्टॉक खत्म होने के बाद मुंबई के लगभग 50 प्रतिशत होटल और रेस्तरां बंद हो सकते हैं।


होटल उद्योग के जानकारों के अनुसार मुंबई में करीब 10,000 से अधिक होटल और रेस्तरां संचालित होते हैं, जिनमें चार लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है। फिलहाल छोटे और मध्यम आकार के करीब 2,000 रेस्तरां अस्थायी रूप से बंद हो चुके हैं क्योंकि उनके पास सीमित गैस स्टॉक था।
वी हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड के अध्यक्ष कमलेश बैरोट के अनुसार, एक सामान्य रेस्तरां को रोजाना तीन से चार एलपीजी सिलेंडर की जरूरत होती है और आमतौर पर चार दिनों का ही स्टॉक रखा जाता है। कमर्शियल 19 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर की कीमत लगभग 1,840 रुपये है, लेकिन संकट के बीच ब्लैक मार्केटिंग की भी शिकायतें सामने आ रही हैं, जहां कुछ विक्रेता 3,000 से 6,000 रुपये तक वसूल रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस संकट का असर पर्यटन उद्योग पर भी पड़ सकता है। मुंबई जैसे शहर में बड़ी संख्या में देश और विदेश से पर्यटक आते हैं और उनमें से कई छोटे व मध्यम रेस्तरां पर निर्भर रहते हैं। यदि गैस संकट लंबा खिंचता है तो होटल उद्योग के साथ-साथ शहर की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर भी इसका असर पड़ सकता है।


 

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