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चैती छठ का आज दूसरा दिन खरना की तैयारी में तेज ; बाजारों में बढ़ी रौनक

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चार दिवसीय चैती छठ महापर्व की शुरुआत रविवार को नहाय-खाय के साथ हो गई। मौसम पूरी तरह साफ नहीं होने और हल्की ठंड के बावजूद व्रतियों की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। सुबह-सुबह व्रतियों ने तालाब, नदी और जलाशयों में स्नान किया और भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। छठ का पहला दिन नहाय-खाय बेहद खास माना जाता है। इस दिन व्रती साफ-सफाई और शुद्धता का विशेष ध्यान रखते हैं। स्नान के बाद घरों में सादा और सात्विक भोजन बनाया जाता है, जैसे कद्दू-भात, दाल और सब्जी। सबसे पहले यह भोजन भगवान को अर्पित किया जाता है, फिर प्रसाद के रूप में व्रती इसे ग्रहण करते हैं और परिवार व आस-पड़ोस में बांटते हैं। नहाय-खाय के बाद अब व्रती खरना की तैयारी में लग गए हैं, जो सोमवार को मनाया जाएगा। इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखते हैं और शाम को खीर, रोटी और फल भगवान को अर्पित करते हैं। पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शुरू हो जाता है।

इसी वजह से बाजारों में भी काफी चहल-पहल है। लोग फल, पूजा सामग्री और जरूरी सामान खरीदने में जुटे हैं। 24 मार्च को व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगे, जिसके लिए घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटेंगे। इसके अगले दिन यानी 25 मार्च को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर इस महापर्व का समापन होगा।इस बार गैस की कमी के कारण कई व्रती लकड़ी, गोइठा और कोयले के चूल्हों का इस्तेमाल कर रहे हैं। छठ का प्रसाद बड़ी मात्रा में बनता है, इसलिए ये पारंपरिक तरीके उनके लिए ज्यादा मददगार साबित हो रहे हैं। वहीं, खरना के लिए दूध की कमी न हो, इसके लिए लोगों ने पहले से ही डेयरी और खटालों में बुकिंग भी कर ली है।