द फॉलोअप डेस्क
उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने समाज की पारंपरिक सोच को झकझोर कर रख दिया है। जहां आमतौर पर तलाक को दुख, शर्म या असफलता से जोड़ा जाता है, वहीं एक पिता ने इसे अपनी बेटी के लिए नई जिंदगी की शुरुआत मानते हुए जश्न में बदल दिया। प्रनीता शर्मा, जिनकी शादी सात साल पहले हुई थी, वैचारिक मतभेदों के कारण अपने रिश्ते को आगे नहीं बढ़ा सकीं। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद जब अदालत ने तलाक को मंजूरी दी, तो परिवार ने इसे अंत नहीं बल्कि एक नई शुरुआत के रूप में देखा।
जैसे ही प्रनीता कोर्ट से बाहर आईं, उनके परिवार ने उन्हें दुल्हन की तरह स्वागत किया। ढोल-नगाड़े बजे, लोग नाचे और पूरे माहौल को उत्सव में बदल दिया गया। परिवार के सभी सदस्यों ने “I Love My Daughter” लिखी टी-शर्ट पहन रखी थी, जो इस आयोजन का सबसे भावनात्मक और मजबूत संदेश बनकर सामने आई। कोर्ट से घर तक का सफर किसी बारात से कम नहीं था- जहां हर कदम पर बेटी का हौसला बढ़ाया गया।
Vineeta got married in 2018. The marriage soon turned bitter and didn't last long. After 7 years, divorce was formalized recently and Vineeta's parents celebrated it with Dhol, dance and sweets in the court premises in Meerut, Uttar Pradesh. Attendees were seen wearing T-shirts… pic.twitter.com/L4JAVH4jxx
— Piyush Rai (@Benarasiyaa) April 5, 2026
रिटायर्ड जज पिता की सोच ने बदला नजरिया
इस अनोखे जश्न के पीछे प्रनीता के पिता की प्रगतिशील सोच रही, जो पेशे से रिटायर्ड जज हैं। उन्होंने साफ कहा कि अगर कोई रिश्ता दुख दे रहा हो, तो उसे ढोने के बजाय सम्मान के साथ खत्म करना बेहतर है।
उनका मानना है कि समाज में तलाक को कलंक की तरह देखना महिलाओं के लिए मानसिक बोझ बन जाता है। उन्होंने अपनी बेटी को यह अहसास दिलाया कि उसकी खुशी और आत्मसम्मान सबसे ऊपर है, समाज की सोच बाद में आती है।

सोशल मीडिया पर वायरल, लोगों ने सराहा
इस पूरे आयोजन का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। यूजर्स ने इस पहल को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम बताया है। कई लोगों ने लिखा कि हर माता-पिता को अपनी बेटी के साथ ऐसे ही खड़ा होना चाहिए, ताकि वह किसी भी परिस्थिति में खुद को अकेला महसूस न करे। हालांकि कुछ लोगों ने इसे दिखावा भी कहा, लेकिन अधिकतर प्रतिक्रियाएं सकारात्मक रहीं। यह घटना सिर्फ मेरठ की नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक संदेश है, कि रिश्ते से ज्यादा जरूरी इंसान की खुशी और सम्मान होता है।
