रांची
झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने आज प्रेस वार्ता कर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संविधान में संशोधन कर एक साजिश के तहत बिना जनगणना या जातीय जनगणना के महिला आरक्षण बिल लागू करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक को वर्ष 2029 में लागू करने की बात कही गई थी, जबकि 2023 में ही इसके लिए संशोधन किया जा चुका था। अब दोबारा संशोधन का प्रस्ताव लाया जाना एक नई साजिश की शुरुआत है।

असली साजिश परिसीमन को लेकर है
भट्टाचार्य ने बताया कि दिसंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था, जिसका उनकी पार्टी ने समर्थन किया था। उस समय भी उन्होंने मांग की थी कि इसे तुरंत लागू किया जाए। लेकिन सरकार ने कहा था कि 2025 में जनगणना और जातीय जनगणना के बाद ही इसे लागू किया जाएगा। अब इतना समय बीत जाने के बावजूद जनगणना नहीं कराई गई है। झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि असली साजिश परिसीमन को लेकर है और महिला आरक्षण का मुद्दा पीछे कर दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश में आदिवासी, अनुसूचित जनजाति और विभिन्न जातियों की सटीक संख्या ही तय नहीं है, तो महिला आरक्षण बिल को लागू कैसे किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण भारत के वे राज्य, जहां जनसंख्या नियंत्रण पर काम हुआ है, परिसीमन के बाद नुकसान में रहेंगे, जबकि केंद्र उन क्षेत्रों में सीटें बढ़ाने की कोशिश करेगा जहां उसे राजनीतिक फायदा मिलता है।
नीतीश और नायडू वापस लें समर्थन
केंद्र सरकार पर हमला करते हुए उन्होंने इसे महिलाओं के साथ धोखा करार दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से हार की आशंका के कारण केंद्र सरकार “महिला कार्ड” खेलने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी जल्द ही चुनाव आयोग को भी इस मुद्दे पर घेरने का काम करेगी। साथ ही हेमंत सोरेन के बंगाल दौरे का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि संविधान की आड़ में लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है, जिसे वे सफल नहीं होने देंगे। सुप्रियो भट्टाचार्य ने चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार से केंद्र सरकार से समर्थन वापस लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि नायडू अपनी जनता के प्रति ईमानदार हैं, तो उन्हें तुरंत समर्थन वापस लेना चाहिए। वहीं नितीश कुमार को लेकर उन्होंने कहा कि बिहार में भाजपा ने उनके चेहरे पर चुनाव जीतने के बाद उन्हें सत्ता से अलग कर दिया, ऐसे में उन्हें भी केंद्र से अपना समर्थन वापस ले लेना चाहिए।