द फॉलोअप डेस्क
आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर झारखंड सहित पूरे देश में महिलाओं के सशक्तिकरण पर चर्चा हो रही है। हर क्षेत्र में शानदार काम कर रही महिलाओं को सराहा जा रहा है। लेकिन इसी उत्साह के बीच महिलाओं के बीच एक कसक भी महसूस की जा रही है। यह कसक है झारखंड राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष पद की कुर्सी पिछले छह साल से खाली होने की। इसे लेकर रांची की मेयर रौशनी खलखो ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि झारखंड में वर्तमान सरकार को जनता ने दो बार मैंडेट दिया है, लेकिन पिछले छह वर्षों से महिला आयोग की अध्यक्ष पद की कुर्सी खाली रहना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार महिलाओं को सम्मान राशि प्रदान करती है, लेकिन वास्तविक सम्मान महिलाओं को नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि महिलाओं का कोई एक दिन नहीं होता, हर पल हर समय महिलाओं का ही है।

आज महिला दिवस मनाया जा रहा है और राज्य सरकार महिलाओं के विकास की गाथा गा रही है, लेकिन पीड़ित महिलाओं के लिए समर्पित महिला आयोग में पिछले छह सालों से अध्यक्ष की कुर्सी खाली है। इसके कारण पीड़ित महिलाओं की हजारों फाइलें पेंडिंग हैं। राज्य की शोषित महिलाएं यह उम्मीद लिए बैठी हैं कि कब उन्हें न्याय मिलेगा। रौशनी खलखो ने आगे कहा कि महिलाओं के दुख-दर्द को दूर करने के लिए महिला आयोग की अध्यक्ष की कुर्सी पर किसी योग्य व्यक्ति को नियुक्त किया जाए। बता दें कि 6 जून 2020 को तत्कालीन अध्यक्ष कल्याणी शरण और सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो गया था। इसके बाद यह पद खाली है और आयोग के सभी कामकाज प्रभावित हो रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 7 जून 2020 से 31 जनवरी 2026 तक कुल 4,014 शिकायतें दर्ज हुई हैं। इनमें घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, यौन शोषण और मानव तस्करी जैसे गंभीर मामले शामिल हैं।
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लेकिन आयोग के गठन न होने के कारण इन मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही है और पीड़ित महिलाओं को न्याय मिलने में देरी हो रही है। सरकार विभागीय कार्रवाई का दावा कर सकती है, लेकिन पीड़ित महिलाओं के लिए समर्पित मंच और त्वरित सुनवाई की व्यवस्था पिछले छह सालों से ठप है। आयोग में एक अध्यक्ष और पांच सदस्यों के पद स्वीकृत हैं। सभी पद खाली रहने के कारण फिलहाल केवल शिकायतें दर्ज की जा रही हैं और फाइलों में रखी जा रही हैं; उन पर आगे कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती।