रांची
ट्रेजरी स्कैम और उत्पाद सिपाही परीक्षा में कथित पेपर लीक को लेकर बीजेपी डेलिगेशन ने राज्यपाल संतोष गंगवार से मुलाकात की है। अब बाबूलाल मरांडी ने रांची के पशुपालन विभाग से अवैध निकासी की जांच की मांग की है। उनकी चिट्ठियों और राज्यपाल से मुलाकात पर सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा ने तंज किया है। बाबूलाल मरांडी के सोशल मीडिया पोस्ट को रीट्विट करते हुए झामुमो ने लिखा कि बढ़िया है। आप एक बढ़िया लेटर लिखिए और महामहिम गर्वनर के घर पर कड़क चाय की चुस्की लीजिए। दरअसल, पिछले 2 दिनों में भाजपा का 2 डेलिगेशन, गर्वनर से मुलाकात कर चुका है। उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक के आरोपों पर आदित्य साहू की अगुवाई में बाबूलाल मरांडी, नवीन जायसवाल और सीपी सिंह ने राज्यपाल से मुलाकात की और मामले की सीबीआई जांच की मांग की। दूसरी ओर इसी मामले को लेकर भानुप्रताप शाही भी गर्वनर से मिले। बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की है कि पशुपालन विभाग में स्कैम की जांच कराई जाए और साथ ही विभागों का ऑडिट हो। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड में रोज एक नया घोटाला उजागर होता है।
झामुमो ने गर्वनर से मुलाकातों पर किया तंज
इसी बात पर तंज करते हुए झामुमो ने लिखा कि बहुत बढ़िया। अब जल्दी से एक लेटर लिखो और महामहिम गवर्नर के घर जाकर कड़क चाय की चुस्की लो। आज चाय का बहाना मिल गया, इसके लिए बधाई हो। आगे बाबूलाल मरांडी को संबोधित करते हुए लिखा गया है कि वैसे, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये सारे स्कैम आपके BJP के सबसे प्यारे रघुबर जी के समय के हैं। हम आपकी इन सभी घटनाओं का पर्दाफाश करेंगे और दोषियों को बिना बेल के जेल भेजेंगे। अपना ध्यान चाय पीने पर ही लगाओ।
बाबूलाल मरांडी ने किस घोटाले की जांच की मांग की
बाबूलाल मरांडी ने इस बीच कहा कि झारखंड में जहां भी जांच होती है, कोई नया घोटाला सामने आ जाता है। जनता त्राहिमाम कर रही है। बाबूलाल मरांडी ने लिखा कि प्रदेश के खोखला किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पत्थर, कोयला, बालू और लौह अयस्क की सीधी लूट हो रही है। ट्रेजरी से अवैध निकासी का खेल भी बेरोक-टोक जारी है। अब रांची में पशुपालन विभाग के 2 कर्मचारियों ने 2 करोड़ 94 लाख रुपये की अवैध निकासी की है। बोकारो, हजारीबाग और पलामू में ट्रेजरी से करोड़ों की अवैध निकासी हुई। बाबूलाल मरांडी ने संदेह जताते हुए कहा कि इतना बड़ा घोटाला बिना वरीय अधिकारियों की मिलीभगत के संभव नहीं है।