द फॉलोअप डेस्क
बीती देर रात लगभग 11 बजे आसनसोल रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 5 पर खड़ी एक ट्रेन के डिब्बे से आरपीएफ ने लगभग 600 तोते के बच्चों को बरामद किया। सभी पक्षी बेहद छोटे थे और उनकी उम्र करीब 15 से 25 दिन बताई गई। घटना की सूचना मिलने पर आरपीएफ ने भारतीय रेल सुरक्षा बल के माध्यम से वन विभाग को तुरंत जानकारी दी। सूचना मिलते ही रूपनारायणपुर स्थित रेंज कार्यालय के फॉरेस्ट रेंजर विश्वजीत शिकदार ने विशेष पहल करते हुए सभी पक्षियों को सुरक्षित रूप से रूपनारायणपुर लाया।
रात करीब 2 बजे इन नन्हे तोतों को लाने के बाद वनकर्मियों के सामने उनकी देखभाल एक बड़ी चुनौती बन गई। इतने छोटे बच्चों को खिलाना, पानी देना और सुरक्षित रखना कठिन कार्य था। इसके बावजूद वन विभाग की टीम पूरी रात जागकर उनकी देखभाल में लगी रही और सुबह होते ही उन्हें सुरक्षित रूप से चिड़ियाघर पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की गई। रेंज अधिकारी विश्वजीत शिकदार ने कहा कि तोते की तस्करी गंभीर अपराध है। लोग शौक के लिए तोते पालते हैं और उन्हें बोलना सिखाते हैं। इसी मांग का फायदा उठाकर तस्कर अवैध कारोबार करते हैं। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि ये छोटे तोते जंगल से पकड़े नहीं गए, बल्कि किसी गुप्त ठिकाने पर ब्रीडिंग कर बिक्री के लिए तैयार किए जा रहे थे। यह संकेत देता है कि यह कारोबार संगठित तरीके से चलाया जा रहा है। इतनी बड़ी संख्या में तोते के बच्चों के बरामद होने के बावजूद किसी तस्कर का अभी तक पता नहीं चल सका। वहीं, पक्षियों को सुरक्षित बचाए जाने पर स्थानीय लोगों और संबंधित विभागों ने आरपीएफ और वन विभाग की तत्परता की सराहना की है।
