द फॉलोअप डेस्क
सिमडेगा समाहरणालय परिसर जो कभी बंजर जमीन के रूप में जाना जाता था, आज हरियाली की एक नई मिसाल बन चुका है। जहां पहले सूखी और खाली पड़ी जमीन थी, वहीं आज लहलहाती फसलें और खूबसूरत गार्डन लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। यह बदलाव सिर्फ एक सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि सोच और पहल का परिणाम है। इस परिवर्तन के पीछे उपायुक्त कंचन सिंह के मार्गदर्शन, निरंतर निगरानी और टीम के सामूहिक प्रयास की अहम भूमिका रही है। उनके नेतृत्व में परिसर को न सिर्फ हरा-भरा बनाया गया, बल्कि इसे पर्यावरण संरक्षण का एक मॉडल भी तैयार किया गया।

परिसर में सौर ऊर्जा से चलने वाली लाइटें और जल संरक्षण की विशेष व्यवस्था इसे और भी आधुनिक और आकर्षक बनाती है। यह पहल न सिर्फ पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ा रही है, बल्कि आने वाले समय के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण भी पेश कर रही है। आज सिमडेगा समाहरणालय परिसर यह संदेश दे रहा है कि अगर सोच सकारात्मक हो और प्रयास सच्चे हों, तो कोई भी बंजर जमीन हरियाली में बदल सकती है।
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