रांची
राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम में ओबीसी महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत उप-आरक्षण की मांग की है. बता दें iइस अधिनियम में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा. मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र का हवाला देते हुए कहा कि पिछड़े वर्ग की महिलाओं को उनका उचित प्रतिनिधित्व मिलना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में लोकसभा और राज्यसभा के कुल 788 सांसदों में ओबीसी महिलाओं की संख्या मात्र 26 है, जो लगभग 3 प्रतिशत के बराबर है. उन्होंने तर्क दिया कि जब पंचायत और स्थानीय निकायों में ओबीसी महिलाओं को आरक्षण का लाभ मिल रहा है, तो लोकसभा और विधानसभाओं में उन्हें इससे वंचित रखना संवैधानिक समानता के अधिकार का उल्लंघन है.
मोर्चा का मानना है कि 103वें संविधान संशोधन के बाद ईडब्ल्यूएस को 10 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने से 50 प्रतिशत आरक्षण की सीमा अब अप्रासंगिक हो चुकी है. ऐसे में 52 प्रतिशत ओबीसी आबादी को उनके अनुपात में प्रतिनिधित्व मिलना ही वास्तविक सामाजिक न्याय होगा. राजेश गुप्ता ने आगे कहा कि 16-17 अप्रैल 2026 को होने वाले विशेष संसद सत्र में इस विसंगति को दूर करते हुए ओबीसी उप-कोटा को शामिल किया जाना चाहिए. अन्यथा यह अधिनियम समाज के निचले पायदान पर खड़ी पिछड़ी महिलाओं के लिए प्रभावहीन साबित होगा.
वहीं महासचिव विद्याधर प्रसाद ने बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर को याद करते हुए भारतीय समाज में महिलाओं के सशक्तिकरण में उनके योगदान पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि बाबा साहब के पदचिह्नों पर चलते हुए अब प्रधानमंत्री को भी एक नया मील का पत्थर स्थापित करना चाहिए. उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत प्रस्तावित 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के भीतर ओबीसी महिलाओं के लिए कम से कम 50 प्रतिशत का उप-आरक्षण सुनिश्चित किया जाए, ताकि इसका लाभ वास्तव में समाज के निचले तबके की महिलाओं तक पहुंच सके.
इसके अलावा आज मंडल आयोग के अध्यक्ष डॉ. बी. पी. मंडल की पुण्यतिथि पर मोर्चा के पदाधिकारियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. साथ ही जलियांवाला बाग के शहीदों को भी नमन किया गया. प्रेस वार्ता में महासचिव विद्याधर प्रसाद, रामावतार कश्यप, निर्मला साह, दीपक कुमार और कार्यालय प्रभारी संतोष शर्मा सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे. सभी ने एक स्वर में “जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” के संकल्प को दोहराया और 2029 के चुनावों से पहले इस संशोधन को लागू करने की मांग की.
