द फॉलोअप डेस्क
हजारीबाग की ऐतिहासिक रामनवमी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था और परंपरा का जीवंत प्रतीक है। इस बार यहां का बना महावीर झंडा सीमाओं को पार कर अमेरिका और लंदन तक पहुंच रहा है। बड़ा बाजार स्थित वीर वस्त्रालय में तैयार ये झंडे अब अंतरराष्ट्रीय पहचान बना रहे हैं। विदेशों में बसे हजारीबाग के लोगों ने विशेष रूप से इन झंडों का ऑर्डर दिया है, जिससे स्थानीय कला को वैश्विक मंच मिल रहा है।
कोरोना काल में जब व्यवसाय ठप पड़ गए थे, उसी समय वीर वस्त्रालय ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का सहारा लिया। सोशल मीडिया के जरिए जब विदेशों में लोगों को यहां की खासियत का पता चला, तो ऑर्डर की झड़ी लग गई। आज दुकान के संचालक देवेन्द्र जैन गर्व के साथ झंडों को कुरियर कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि हजारीबाग की पहचान को दुनिया तक पहुंचाने का माध्यम बन चुका है।
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इस कहानी का सबसे खास पहलू है भाईचारे की अनूठी मिसाल। एक मुस्लिम परिवार, गुलाम जलानी का परिवार, पिछले तीन पीढ़ियों से हनुमान झंडा बना रहा है। उनके हाथों से बने झंडे न केवल रामनवमी में लहराते हैं, बल्कि कई मंदिरों में भगवान के वस्त्र भी वही तैयार करते हैं। यह परंपरा दर्शाती है कि हजारीबाग में धर्म से ऊपर इंसानियत और आपसी सम्मान की भावना है।
कारीगर गुलाम जलानी बताते हैं कि इस साल बड़े-बड़े झंडों की मांग काफी बढ़ी है। हर ऑर्डर के साथ उनकी मेहनत और श्रद्धा भी जुड़ी होती है। उन्हें गर्व है कि उनके बनाए झंडे अब विदेशों में भी लहराएंगे। रामनवमी के दौरान हजारीबाग की सड़कों पर जो दृश्य बनता है, वह किसी अयोध्या से कम नहीं लगता। आज हजारीबाग केवल एक जिला नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और एकता का प्रतीक बनता जा रहा है। यहां का महावीर झंडा अब सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय पहचान का हिस्सा बन चुका है। यह कहानी बताती है कि जब हुनर, आस्था और भाईचारा साथ चलते हैं, तो छोटी जगह से भी दुनिया तक पहुंचा जा सकता है।
