हजारीबाग
हजारीबाग में पुलिस पर लगे गंभीर आरोपों ने कानून-व्यवस्था के साथ-साथ पुलिस कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक महिला ने हजारीबाग मुफस्सिल थाना के कर्मी पर मारपीट, अभद्र व्यवहार, जातिसूचक टिप्पणी और अवैध वसूली की कोशिश जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता के अनुसार, नोटिस किसी जमीनी विवाद से जुड़े मामले में दर्ज केस का था, जिसे देने महिला थाना कर्मी खुशबू कुमारी बिना वर्दी के ट्राउजर और सफेद कुर्ती पहनकर उनके घर पहुंची थीं। महिला का आरोप है कि नोटिस देने के बाद 10 हजार की मांग की गई। जब परिवार ने पैसे देने से इनकार किया, तो गाली-गलौज की गई और कथित तौर पर जातिसूचक टिप्पणी भी की गई। इसके बाद थाने से अन्य कर्मियों को बुलाकर महिला को जबरन उठा लिया गया। पीड़िता का कहना है कि उसे उसके दो साल के बच्चे के साथ करीब 38 घंटे तक थाने में रखा गया। इस दौरान कथित तौर पर पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा उसके साथ मारपीट की गई। महिला का दावा है कि उसके शरीर पर चोट के निशान मौजूद हैं, जिनमें कुछ ऐसे स्थानों पर हैं जिन्हें वह सार्वजनिक रूप से दिखा नहीं सकती।

सास को भी हिरासत में ले लिया गया
महिला का आरोप है कि नोटिस देने के बाद 10 हजार की मांग की गई। जब परिवार ने पैसे देने से इनकार किया, तो गाली-गलौज की गई और कथित तौर पर जातिसूचक टिप्पणी भी की गई। इसके बाद थाने से अन्य कर्मियों को बुलाकर महिला को जबरन उठा लिया गया। पीड़िता का कहना है कि उसे उसके दो साल के बच्चे के साथ करीब 38 घंटे तक थाने में रखा गया। इस दौरान कथित तौर पर पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा उसके साथ मारपीट की गई। महिला का दावा है कि उसके शरीर पर चोट के निशान मौजूद हैं, जिनमें कुछ ऐसे स्थानों पर हैं जिन्हें वह सार्वजनिक रूप से दिखा नहीं सकती। आरोप है कि जब उसकी सास छुड़ाने पहुंचीं, तो उन्हें भी हिरासत में ले लिया गया। परिवार का कहना है कि पुलिस ने धमकी दी कि अगले दिन थाने नहीं पहुंचे तो घर से उठा लिया जाएगा। अब सवाल केवल आरोपों का नहीं, बल्कि प्रक्रिया और संवेदनशीलता का भी है। यदि महिला के साथ पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा मारपीट की गई, तो यह गंभीर मानवाधिकार और पुलिस आचरण का मामला बनता है। साथ ही जमीनी विवाद के केस में नोटिस देने की प्रक्रिया और पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं।

पुलिस ने किया आरोपों से इनकार
घटना के बाद पीड़िता ने हजारीबाग एसपी और डीआईजी कार्यालय में लिखित शिकायत देकर न्याय की मांग की है। वहीं इस पूरे मामले पर The Follow-Up ने मुफस्सिल थाना से पक्ष जानना चाहा तो थाना प्रभारी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। यह एक मामला केवल एक परिवार की शिकायत नहीं, बल्कि पुलिसिंग की पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता के भरोसे की परीक्षा बन चुका है। देखना होगा कि जांच में सच्चाई क्या सामने आती है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों पर कार्रवाई कब होती है।