द फॉलोअप डेस्क
झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का विज्ञापन रद्द होने की संभावना है। भोजपुरी, अंगिका और मगही भाषाओं को लेकर चल रहे विवाद के कारण यह फैसला लिया जा सकता है। झारखंड एकेडमिक काउंसिल ने 21 अप्रैल से 21 मई तक आवेदन प्रक्रिया के लिए पिछले महीने विज्ञापन जारी किया था। यह विज्ञापन कैबिनेट की मंजूरी मिलने की उम्मीद में निकाला गया था, लेकिन गुरुवार को हुई बैठक में इस पर सहमति नहीं बन सकी। इसके चलते झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली 2026 को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।

भाषा विवाद के कारण नियमावली पर बनी असहमति
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मंजूरी के बाद 26 मार्च को नियमावली 2026 की अधिसूचना जारी कर दी थी। साथ ही आवेदन की तारीखें भी घोषित कर दी गई थीं। हालांकि नियमावली में भोजपुरी, अंगिका और मगही जैसी प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल नहीं किया गया, जबकि सीमित क्षेत्रों में बोली जाने वाली उड़िया को जगह दी गई। इस फैसले का राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों ने विरोध किया। कैबिनेट बैठक में भी कई मंत्रियों ने इस पर आपत्ति जताई, लेकिन लंबी चर्चा के बावजूद अंतिम निर्णय नहीं हो सका।

लंबे समय से नहीं हुई टीईटी परीक्षा, अभ्यर्थी परेशान
झारखंड में अब तक केवल 2012 और 2016 में ही शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित हुई है। पिछले कई वर्षों से टीईटी नहीं होने के कारण अभ्यर्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर 2016 के बाद बीएड करने वाले उम्मीदवार न तो टीईटी दे पा रहे हैं और न ही शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल हो पा रहे हैं। अब यदि सरकार 20 अप्रैल तक नियमावली को पुराने स्वरूप में लागू करती है तो बिना इन भाषाओं के आवेदन शुरू हो जाएंगे, लेकिन यदि संशोधन कर भाषाओं को जोड़ा जाता है तो विज्ञापन वापस लेना पड़ेगा।
