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नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर झारखंड कांग्रेस ने उठाये सवाल, बताया- भाजपा पर क्यों नहीं किया जा सकता भरोसा 

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रांची

झारखंड प्रदेश कांग्रेस ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर सवाल उठाए हैं और बताया है कि इस मामले में भाजपा क्यों भरोसा करने के लायक नहीं है। प्रदेश कांग्रेस महासचिव सह मिडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने इस पर तंज कसते हुए कहा, कांग्रेस का मानना है कि महिलाओं को सशक्त बनाने के नाम पर केंद्र सरकार ने एक ऐसा कानून पेश ला रही है जो वास्तविक अधिकार देने के बजाय केवल राजनीतिक लाभ लेने का माध्यम बन गया है।
कांग्रेस नेता ने कहा, महिलाओं को आरक्षण देने का विचार नया नहीं है। यह पहल वर्षों पहले कांग्रेस सरकार के दौरान ही शुरू की गई थी, जब महिला आरक्षण बिल को संसद में लाया गया था। लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे ऐसे समय पर लागू करने की बात कही है, जब इसके क्रियान्वयन को जनगणना और परिसीमन जैसी प्रक्रियाओं से जोड़ दिया गया है। इससे साफ है कि सरकार इसे तुरंत लागू करने के बजाय टालने की नीति अपना रही है।

जनगणना और परिसीमन का हवाला एक तरह का छल

कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि यदि सरकार की नीयत साफ होती, तो वह इस कानून को बिना किसी शर्त के तुरंत लागू करती। जनगणना और परिसीमन का हवाला देकर महिलाओं को उनके अधिकारों से दूर रखना एक तरह का छल है। इससे यह आशंका पैदा होती है कि यह कानून 2029 या उससे भी आगे तक लागू नहीं हो पाएगा, जिससे महिलाओं को तत्काल कोई लाभ नहीं मिलेगा।
इसके अलावा,  इस अधिनियम में पिछड़ी जाति (OBC) की महिलाओं के लिए कोई अलग प्रावधान नहीं किया गया है। कांग्रेस का मानना है कि जब तक सामाजिक न्याय के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जाएगा, तब तक यह अधिनियम अधूरा रहेगा। महिलाओं के भीतर भी जो सामाजिक और आर्थिक असमानताएं हैं, उन्हें नजरअंदाज करना अन्यायपूर्ण है।

केंद्र सरकार ने इसे राजनीतिक इवेंट बनाकर पेश किया
इसके अलाबा सरकार ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सभी दलों के साथ व्यापक चर्चा नहीं की। लोकतंत्र में ऐसे बड़े फैसले सर्वसम्मति से और गंभीर विमर्श के बाद लिए जाने चाहिए। लेकिन केंद्र सरकार ने इसे राजनीतिक इवेंट बनाकर पेश किया, जिससे इसकी गंभीरता कम हो गई। कांग्रेस का यह भी कहना है कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए केवल आरक्षण ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आर्थिक अवसर भी मिलने चाहिए। आज देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार की चुप्पी यह दिखाती है कि उसकी प्राथमिकताएं क्या हैं।
अंततः कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि वह महिलाओं के अधिकारों और उनके सशक्तिकरण के पक्ष में हमेशा खड़ी रही है और आगे भी रहेगी। लेकिन ऐसे  कानून से क्या जिसका वास्तविक लाभ महिलाओं तक पहुंचने में वर्षों लग जाए। कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को बिना शर्त और तुरंत लागू किया जाए, साथ ही इसमें OBC महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान भी जोड़ा जाए, ताकि यह कानून वास्तव में महिलाओं के सशक्तिकरण का माध्यम बन सके, न कि केवल एक राजनीतिक घोषणा।

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