logo

सत्ता में बने रहने के लिए केंद्र लाना चाहता था महिला आरक्षण बिल, बिना जाति जनगणना कराये ये SC-ST-OBC महिलाओं का हक मारना चाहते हैं- कांग्रेस

सत्ता में बने रहने के लिए केंद्र लाना चाहता था महिला आरक्षण बिल, बिना जाति जनगणना कराये ये SC-ST-OBC महिलाओं का हक मारना चाहते हैं- कांग्रेस

रांची 

झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने रांची में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। ये प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन नहीं बल्कि “राजनीतिक भाषण” जैसा प्रतीत होता है। सरकार महिलाओं और आम जनता के मुद्दों से ध्यान भटका रही है। कहा कि कांग्रेस महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन इसे बिना देरी के लागू किया जाए और 2029 के चुनाव में महिलाओं को 33% आरक्षण दिया जाए। साथ ही प्रधानमंत्री के संबोधन को “राजनीतिक भाषण” बताते हुए कांग्रेस ने कहा कि सरकार महिलाओं के मुद्दों पर गंभीर नहीं है और केवल चुनावी रणनीति के तहत काम कर रही है।महिला आरक्षण और केंद्र सरकार पर कांग्रेस का आरोप
प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण के नाम पर 2011 की जनगणना और परिसीमन को आधार बनाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा महिलाओं को वास्तविक अधिकार देना नहीं, बल्कि सत्ता में बने रहना है। उन्होंने मांग की कि 2023 में पारित महिला आरक्षण विधेयक को बिना किसी देरी के लागू किया जाए और 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। विपक्ष समर्थन देने के लिए पूरी तरह तैयार है। मोदी-शाह की जोड़ी ने देश की आधी आबादी को ढाल बनाकर परिसीमन करने की कोशिश की और इस देश के लोकतंत्र, संविधान और संघवाद को चोट पहुंचाने का एक घृणित प्रयास किया। उन्होंने यह भी कहा है कि दोनों अपनी राजनीति को चमकाने के लिए भारत के लोकतंत्र को तबाह करने चले थे और उनकी यह साजिश गिर गयी। अगर ऐसे ही बात है तो विपक्ष ने पहले जनगणना, फिर डीलिमिटेशन और उसके बाद महिला आरक्षण पर सहमति दी थी, लेकिन सरकार ने संशोधन किया और इसे पारित करते समय विपक्ष से बातचीत या विमर्श नहीं किया। सवाल यह है कि बंगाल और तमिलनाडु चुनाव के दौरान संसद में संशोधन लाने की इतनी जल्दी क्यों थी।राष्ट्र के नाम संबोधन नहीं  बल्कि चुनावी भाषण
प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन को “चुनावी भाषण” बताया और कहा कि इससे जनता की समस्याओं का समाधान नहीं होता। उन्होंने प्रधानमंत्री पर कांग्रेस को महिला विरोधी बताने पर आपत्ति जताई और कहा कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं का नेतृत्व किया है, जैसे एनी बेसेंट, सरोजनी नायडू और इंदिरा गांधी। साथ ही पंचायतों में महिलाओं के 14.5 लाख प्रतिनिधित्व का श्रेय भी कांग्रेस की नीतियों को दिया। उन्होंने उन्नाव, हाथरस, कठुआ और मणिपुर मामलों पर सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाया और इसे माफी न मांगने योग्य बताया। महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लेकर उन्होंने कहा कि इसे 2029 तक टालना गलत है और इसे तुरंत 33% आरक्षण के साथ लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार पर महंगाई, बेरोजगारी और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।साथ ही उन्होंने ओबीसी महिलाओं को भी उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग की और सरकार को महिला आरक्षण तुरंत लागू करने की चुनौती दी।

महिला आरक्षण विधेयक को लेकर विपक्ष का केंद्र सरकार पर तीखा हमला
वहीं, विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक को परिसीमन से जोड़कर इसे राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बना दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जातीय जनगणना और आरक्षण के वास्तविक आंकड़ों को सामने आने से रोकना चाहती है। ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक की आड़ में सरकार अपनी राजनीति चमकाने का प्रयास कर रही है, लेकिन जनता अब इन मुद्दों को समझ चुकी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं के अधिकारों के साथ खिलवाड़ कर रही है। वहीं प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रमा खलखो ने कहा कि इस मुद्दे को राज्यभर में उठाया जाएगा और केंद्र सरकार की “साजिश” को जनता के सामने उजागर किया जाएगा।

Tags - RanchiCongress