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4 महीने से नियुक्ति के इंतजार में भटक रहे 324 सहायक आचार्य, विभाग मौन है!

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द फॉलोअप डेस्क:

झारखंड में सरकारी नौकरी के के लिए वैकेंसी आने से लेकर नियुक्ति पाने तक, नौजवानों को इंतजार का लंब सफर तय करना पड़ता है। वेकैंसी आएगी, परीक्षा होगी, आंसर की आयेगा और परिणाम भी जारी होगा। इसके बाद भी गारंटी नहीं है कि नियुक्ति समय पर मिल जाएगी। हमारी तो सलाह है कि जेपीएससी और जेएसएससी अपने कार्यालय के बाहर बोर्ड लगाएं जिसमें लिखा हो कि नौकरी की उम्मीद में नियुक्ति की गारंटी ना मांगें। आज जब सरकार 63 बाल विकास परियोजना पदाधिकारी और 237 महिला पर्यवेक्षिका को नियुक्ति पत्र देकर सरकारी नौकरी देने के अपने वादे का पूरा होने का जश्न मना रही है, हमारा सवाल है, कि उन 324 सहायक आचार्यों को नियुक्ति कब मिलेगी, जिनके बूते सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम  वाली गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का वादा किया जाता है। 

2023 में आई थी सहायक आचार्य की वेकैंसी
2023 में सहायक आचार्य भर्ती की वेकैंसी आई थी। 2024 में लिखित परीक्षा का आयोजन हुआ था। 26001 पद पर निकली वेकैंसी के मुकाबले करीब 11000 सहायक आचार्यों का चयन किया गया था। 15 हजार से ज्यादा पद खाली रह गये। जिनका चयन हुआ है, वो महीनों से नियुक्ति के इंतजार में बैठे हैं। जेएसएससी ने विभिन्न चरणों में रिजल्ट जारी किया है। इसी कड़ी में 11 दिसंबर 2025 को रिजल्ट जारी करके लगभग 350 सहायक आचार्यों को चयनित घोषित किया गया। दिसंबर 2025 के  आखिरी हफ्ते और जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में विभिन्न जिलों में जिला शिक्षा अधीक्षक के कार्यालय में इनकी काउंसिलिंग हुई। इन्होंने अपने डॉक्युमेंट जमा कराए। अब अप्रैल खत्म होने को है लेकिन, ये 324 लोग अभी भी नियुक्ति पत्र के इंतजार में हैं। 

4 महीने से नियुक्ति की उम्मीद में हैं अभ्यर्थी
इन अभ्यर्थियों को जनवरी से अप्रैल तक, इन 4 महीनों में केवल उम्मीद मिली है। कोई भरोसा या आश्वासन भी नहीं कि कब तक नियुक्ति पत्र मिलेगा।  चयनित सहायक आचार्यों ने द फॉलोअप से बताया कि उन्होंने डीईओ कार्यालय में पूछताछ की थी, लेकिन माकूल जवाब नहीं मिला। जिला शिक्षा अधीक्षक का केवल इतना कहना है कि हमारी ओर से प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है, लेकिन विभाग की ओर से हमें आपकी नियुक्ति के संबंध में कोई निर्देश नहीं मिला है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये सहायक आचार्य स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के मातहत आते हैं। सवाल है कि जब दावा अंग्रेजी माध्यम वाली गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का है तो, शिक्षकों की नियुक्ति में कोताही कैसी। जब स्कूलों में शिक्षक ही नहीं होंगे, कौन देगा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा। 

सहायक आचार्यों की नियुक्ति में देरी। यह उस प्रदेश का हाल है जहां सरकार ने ही स्वीकार किया है कि 9,700 स्कूलों में एकल शिक्षक हैं। 

कई सहायक आचार्यों की काउंसिलिंग नहीं हुई
21 अप्रैल को बाल विकास परियोजना पदाधिकारी और महिला पर्यवेक्षिका को नियुक्ति पत्र मिला। इससे पहले जेपीएससी सिविल सेवा के 342 चयनित अधिकारियों और जेएसएससी सीजीएल के 1932 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिल चुका है। फूड सेफ्टी ऑफिसर के 54 अभ्यर्थी भी नियुक्ति पत्र पाने के लिए क्यू में हैं। केवल सहायक आचार्यों की नियुक्ति पर ही आफत है। अभ्यर्थियों ने हमें जानकारी दी है कि आयोग ने 2 और बार सहायक आचार्य नियुक्ति का रिजल्ट जारी किया है, लेकिन उनकी तो काउंसिलिंग भी नहीं हुई। 

नियुक्ति की मांग को लेकर इन सहायक आचार्यों ने गांडेय विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन को भी पत्र लिखा। इसमें जानकारी दी है कि वे अपनी परेशानी लेकर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, मनिका विधायक रामचंद्र सिंह, शिक्षा सचिव उमाशंकर सिंह और डुमरी विधायक जयराम महतो से मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। कहीं  से स्पष्ट जवाब नहीं मिला। 

सरकारी उदासीनता ने अधर में लटकाया भविष्य
यहां सरकारी नौकरी के लिए अधिकृत 2 संस्थाएं जेपीएससी और जेएसएससी की कार्यशैली तो विवादों में रहती ही है, अभकी सरकारी उदासीनता ने 324 सहायक आचार्यों को अधर में लटका दिया है। पड़ोसी रिश्तेदार जानते हैं कि फलां आदमी सहायक आचार्य बन गया है, तो अब सवाल पूछते हैं कि भैया नौकरी लगी है तो गांव में क्यों हो। कौन से स्कूल में पढ़ाना है। कब से नौकरी ज्वॉइन करोगे। इन सवालों का जवाब जो लोग जानते हैं, उनकी जवाबदेही संदेहास्पद है। जो पीड़ित हैं, वे जवाब देकर थक चुके हैं। 

इंतजार कब तक करेंगे भला। दुनिया में यदि हर सजीव और निर्जीव चीज की एक्सपायरी डेट होती है तो इंतजार की भी होनी चाहिए। इंतजार की कोई तो सीमा होगी। कब तक ये 324 सहायक आचार्य यूं ही अधर में लटके रहेंगे। नियुक्ति कब होगी, कौन जवाब देगा।

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