चाईबासा
पश्चिमी सिंहभूम जिले में जमीन के नीचे सोने के संभावित भंडार की तलाश ने रफ्तार पकड़ ली है. चाईबासा के परडीहा, परासी और जोंको-भरंडिया क्षेत्र में करीब 1900 हेक्टेयर में खान एवं भूतत्व विभाग द्वारा व्यापक स्तर पर सर्वे और ड्रिलिंग का काम किया जा रहा है. यह प्रक्रिया केवल मिट्टी की परतों को नहीं चीर रही, बल्कि उस संभावना को भी परख रही है, जो इस क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदल सकती है.
GSI के सर्वे में सोना मिलने के संकेत
ज्योलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (GSI) की प्रारंभिक रिपोर्ट में यहां उच्च गुणवत्ता वाले सोना होने के संकेत मिले है. इसके बाद राज्य स्तर पर जांच को गति दे दी गई है. इसी आधार पर अब विस्तृत अन्वेषण शुरू किया गया है, जिसमें आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है. रांची स्थित भूतत्व निदेशालय द्वारा एयरबोर्न जिओफिजिकल सर्वे, यानी हेलीबॉर्न सर्वे के माध्यम से जमीन के भीतर खनिज संरचनाओं की मैपिंग की जा रही है. इसके साथ-साथ चिन्हित स्थानों पर बोरहोल ड्रिलिंग कर इन संकेतों का भौतिक सत्यापन भी किया जा रहा है.

2.17 पीपीएम के करीब सोने की मात्रा
भू-वैज्ञानिकों के अनुसार, इस क्षेत्र में क्वार्ट्ज-कार्बोनेट वेन्स के रूप में सोने की शिराओं के संकेत मिले हैं, जो खनन के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं. रासायनिक विश्लेषण में यहां सोने की मात्रा करीब 2.17 पीपीएम तक दर्ज की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्तर संभावनाशील श्रेणी में आता है, इसलिए चरणबद्ध तरीके से ड्रिलिंग कर वास्तविक भंडार का आकलन किया जा रहा है. भूतत्व निदेशालय रांची के निदेशक कुमार अमिताभ ने भी पुष्टि की है कि पश्चिमी सिंहभूम में सोने के स्पष्ट संकेत मिले हैं और विस्तृत अध्ययन जारी है. उन्होंने कहा कि यदि जांच में ठोस भंडार की पुष्टि होती है, तो संबंधित क्षेत्र को माइनिंग ब्लॉक के रूप में विकसित कर सरकार को सौंप दिया जायेगा, जिसके बाद नीलामी प्रक्रिया के जरिए खनन कार्य शुरू कराया जायेगा.
पहले भी मिले चुके है सोने के संकेत
बता दें कि पश्चिमी सिंहभूम पहले से ही देश के प्रमुख खनिज क्षेत्रों में अपनी अनूठी पहचान रखता है. जिले के किरीबुरू, मेघाहातुबुरु और गुवा जैसे इलाके देश के सबसे बड़े लौह अयस्क बेल्ट का हिस्सा हैं, जबकि चक्रधरपुर के पहाड़डीह क्षेत्र में पहले भी सोने के संकेत मिल चुके हैं। इसके अलावा मैंगनीज, क्रोमाइट, चूना पत्थर और निकेल जैसे खनिजों की प्रचुरता इस जिले को खनिज संपदा का केंद्र बनाती है. ऐसे में यदि यहां सोने के भंडार की पुष्टि होती है, तो यह खोज न सिर्फ पश्चिमी सिंहभूम, बल्कि पूरे झारखंड के आर्थिक परिदृश्य को नई दिशा दे सकती है. खनन गतिविधियों के विस्तार से रोजगार, निवेश और औद्योगिक विकास के नये अवसर खुलने की उम्मीद भी जताई जा रही है.