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गढ़वा में पशु तस्करी पर कड़ा नियंत्रण, SDM ने समीक्षा बैठक में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए

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द फॉलोअप डेस्क 

गढ़वा सदर अनुमंडल क्षेत्र में झारखंड गोवंशीय पशु हत्या प्रतिषेध अधिनियम 2005 का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने को लेकर सदर अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ गुरुवार शाम में समीक्षा बैठक की। बैठक में पशुपालन, पुलिस, अंचल, खाद्य सुरक्षा, नगर परिषद एवं अन्य तकनीकी विभागों के पदाधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान पशु तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए छापेमारी, जब्ती, जांच एवं निगरानी से संबंधित व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई। एसडीएम ने निर्देश दिया कि गोवंश के अवैध परिवहन एवं खरीद-बिक्री पर सघन जांच और धरपकड़ अभियान चलाया जाए। साथ ही प्रतिबंधित मांस के दृष्टिकोण से संदिग्ध होटलों एवं रेस्टोरेंट में नियमित जांच और छापेमारी सुनिश्चित की जाए। पेशेवर अवैध पशु कारोबारियों की पहचान कर उनके विरुद्ध निषेधात्मक कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया गया। एसडीएम ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ नियमित कार्रवाई करने को कहा, ताकि अवैध गोवंश पशु परिवहन एवं तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

वहीं बैठक में एसडीपीओ नीरज कुमार, जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. विद्या सागर सिंह, अंचलाधिकारी गढ़वा सफी आलम, अंचलाधिकारी मेराल यशवंत नायक, जिला पशु चिकित्सा पदाधिकारी डा. रंजन कुमार झा, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी दीप श्री, पुलिस निरीक्षक सुनील तिवारी, मेराल के थाना प्रभारी, बाजार समिति के प्रभारी पदाधिकारी आशीष कुमार सर्राफ, नगर प्रबंधक ओमकार यादव, सहित अन्य पदाधिकारियों ने अपने अपने विचार रखे। एसडीएम ने कहा कि गोवंशीय पशु तस्करी में अवैध पशु कारोबारियों के अलावा वे आम लोग भी दोषी है जो अपने गोवंशीय पशुओं के बूढ़ा, बीमार या अनुपयोगी होने के बाद पैसा लेकर उन्हें पशु तस्करों के हवाले कर देते हैं, यह जानते हुए भी कि इन तस्करों द्वारा उनके पशुओं को बूचड़खाना भी भेजा जा सकता है। इसलिए जांच अभियान में ऐसे लोगों को भी चिन्हित किया जाएगा ताकि उन पर भी अधिनियम के अनुसार कार्रवाई की जा सके। उन्होंने बताया कि जब्त किए गए पशुओं के रखरखाव और पुनर्वास का खर्चा उन्हीं लोगों से वसूला जाएगा जिन्होंने अपने जानवर इन तस्करों को बेचे हैं।

एसडीएम ने जानकारी दी कि उनके लगातार दो दिन के औचक भ्रमण में बाजार समिति परिसर में पशुओं के अवैध कारोबार की प्रथम दृष्टया पुष्टि हुई है, इस संदर्भ में बाजार समिति पणन सचिव से स्पष्टीकरण पूछा जा रहा है की किन परिस्थितियों में उनके परिसर का उपयोग पशु तस्करों द्वारा किया जा रहा है। साथ ही निर्देश दिया गया कि बाजार समिति में जिन किसानों के द्वारा गोवंशीय पशुओं की खरीद बिक्री की जा रही है उनके आधारकार्ड विवरण और रजिस्टर संधारित करना अनिवार्य रहेगा। उन्होंने नगर निकायों और थाना प्रभारियों को भी निर्देश दिया कि वे अपने क्षेत्राधिकार में अवैध बूचड़खानों की गोपनीय जानकारी जुटाने का कार्य करें और यदि कोई ऐसा मामला प्रकाश में आए तो उस पर त्वरित कार्रवाई करें। उन्होंने अंत में सभी अधिकारियों से कहा कि वे न केवल गोवंशीय पशु हत्या प्रतिषेध अधिनियम 2005 के तहत कार्रवाई करेंगे, बल्कि पशु क्रूरता अधिनियम 1960 के तहत अन्य जानवरों के प्रति क्रूरता के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।

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