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विदेशी धन के प्रवाह से अवैध गतिविधियों के विरुद्ध झारखंड में भी ईडी की कार्रवाई की संभावना

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द फॉलोअप, रांची

विदेशी डेबिट कार्डों के माध्यम से धन हस्तांतरण से संबंधित FEMA की चल रही जांच के सिलसिले में ED ने पिछले दिनों अखिल भारतीय स्तर पर तलाशी अभियान चलाया है। ईडी की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार 18 और 19 अप्रैल, 2026 को कई राज्यों में छह स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। यह अभियान विदेशी बैंक डेबिट कार्डों का उपयोग करके नियामक प्रक्रियाओं को दरकिनार करते हुए संदिग्ध रूप से धन निकासी और उपयोग से संबंधित है। यह जांच भारत में "द टिमोथी इनिशिएटिव (टीटीआई)" नामक आंदोलन से जुड़ी गतिविधियों और आंदोलन से संबंधित व्यक्तियों के बारे में है। टीटीआई एक वैश्विक ईसाई मिशनरी संगठन है, जो मुख्य रूप से दुनिया भर में शिष्यों (Disciples) की संख्या बढ़ाने, नए चर्च स्थापित करने और स्थानीय नेताओं को प्रशिक्षित करने का काम करता हैवैसे यह अभियान फिलहाल छत्तीसगढ़ व कुछ अन्य राज्यों में चलाया गया है। लेकिन ईडी की सूत्रों की मानें तो झारखंड में भी विदेशी धन के माध्यम से अवैध गतिविधियों के संचालित होने से इंकार नहीं किया जा रहा है। संभावना व्यक्त की जा रही है कि ईडी और केंद्रीय एजेंसियां झारखंड में भी इस तरह की विदेशी गतिविधियों पर नकेल कसने की दिशा में जल्द ही कोई कड़ी कार्रवाई करेगी।


ईडी द्वारा जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि अमेरिका के ट्रूइस्ट बैंक से जुड़े विदेशी डेबिट कार्ड भारत में लाए गए और भारत के कई राज्यों में एटीएम से बार-बार नकदी निकालने के लिए इसका इस्तेमाल किया गया। एटीएम से निकाली गई राशि का उपयोग भारत में टीटीआई की गतिविधियों से जुड़े खर्चों को पूरा करने के लिए किया गया, जो एक ऐसा संगठन है जो एफसीआरए (FCRA) के तहत पंजीकृत नहीं है। जांच में भारत के विभिन्न हिस्सों में कई व्यक्तियों की संलिप्तता का भी पता चला है। मीका मार्क के पास से 24 विदेशी डेबिट कार्ड बरामद हुए, जिसे ईडी द्वारा जारी एलओसी के आधार पर बेंगलुरु अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन ने कार्ड भारत लाते समय रोका था। 
ईडी की जांच में आगे पता चला कि छत्तीसगढ़ के धमतरी और बस्तर क्षेत्र सहित वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित क्षेत्रों में इन विदेशी डेबिट कार्डों का उपयोग करके असामान्य और संदिग्ध नकदी निकासी की गई है। पिछले कुछ वर्षों में लगभग 6.5 करोड़ रुपये निकाले गए हैं। यह देखा गया है कि इन विदेशी डेबिट कार्डों का उपयोग नकदी निकालने के लिए किया जा रहा है। योजनाबद्ध तरीके से बड़ी मात्रा में नकदी की निकासी संगठित नेटवर्क की संलिप्तता का संकेत देती है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नकदी आधारित समानांतर अर्थव्यवस्था का ऐसा उदय भारत की सुरक्षा और वित्तीय अखंडता के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है और अवैध गतिविधियों के लिए अवैध धन के आवागमन को सुगम बना सकता है। इस राशि का उपयोग धर्मांतरण में भी किए जाने से इंकार नहीं किया जा रहा है।


जांच में आगे पता चला कि एटीएम से नकदी निकासी और उसके उपयोग का रिकॉर्ड रखने के लिए एक बिलिंग और अकाउंटिंग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा था। यह प्लेटफॉर्म कथित तौर पर भारत के बाहर से संचालित संस्थाओं द्वारा नियंत्रित है। जांच में यह भी पता चला है कि नवंबर 2025 से अप्रैल 2028 की अवधि के दौरान विदेशी डेबिट कार्डों का उपयोग करके लगभग 95 करोड़ रुपये भारत में भेजे गए थे। तलाशी के परिणामस्वरूप 25 विदेशी बैंक डेबिट कार्ड, 40 लाख रुपये नकद, विभिन्न आपत्तिजनक डिजिटल साक्ष्य, उपकरण और दस्तावेज जब्त किए गए। ईडी के अनुसार जांच जारी है, जिसमें कई और तरह के खुलासे की संभावना है।

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