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चंपाई सोरेन ने किया धर्म परिवर्तन पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत, केंद्र से नियमों में आवश्यक सुधार का भी आग्रह

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द फॉलोअप डेस्क
पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने कहा है कि आज सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय में यह तय कर दिया कि धर्म परिवर्तन के बाद आप अपनी मूल पहचान को मिले SC/ST Act समेत तमाम अधिकार खो देते हैं। धर्मांतरण से अनुसूचित जाति को बचाने हेतु सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का स्वागत है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 में यह स्पष्ट किया गया है कि केवल हिन्दू, सिख या बौद्ध धर्म के दलितों को ही अनुसूचित जाति का दर्जा मिलता है, और ईसाई या मुस्लिम बनते ही वे संविधान प्रदत्त सारे अधिकार खो देते हैं। सुप्रीम कोर्ट एवं कई हाई कोर्टों ने भी यह बार-बार, लगातार कहा है कि धर्म परिवर्तन के बाद अधिकारों को जबरन छीनने की कोशिश वास्तव में संविधान को धोखा देना है। लेकिन यहां धर्मांतरण करवाने वाले, इन सब को छिपा कर, कभी मजबूरी का फायदा उठा कर, कभी लालच देकर, कभी अन्य कारणों से दिग्भ्रमित कर लोगों को मतांतरित करवाते हैं। 

हमारा स्पष्ट तौर पर मानना है कि जब आप अपनी जमीन से कट जाते हैं, अपने पूर्वजों को धोखा देते हैं और हजारों साल पुरानी परंपराओं एवं जीवनशैली को त्याग कर, एक नए घर में जाने का फैसला करते हैं, तो आपको आरक्षण समेत उन सुविधाओं को पाने का कोई अधिकार नहीं होता, जो सिर्फ SC/ST समाज को मिलती हैं। हम आदिवासी पेड़ के नीचे बैठ कर पूजा करने वाले लोग हैं और जन्म से लेकर मृत्यु तक, हमारी बिल्कुल स्पष्ट जीवनशैली है। बच्चे के जन्म, नामकरण, विवाह समेत जीवन के सभी महत्वपूर्ण पड़ावों पर, हम मांझी परगना/ पाहन/ मानकी/ मुंडा/ पड़हा राजा आदि के पास जाते हैं। जो भी व्यक्ति हमारी जीवन शैली एवं परंपराओं को छोड़ता है, वह आदिवासी नहीं है। फिर उसे हमारे समाज को मिले अधिकारों में अतिक्रमण का भी कोई अधिकार नहीं है। मुझे आशा है केन्द्र सरकार इस गंभीर मुद्दे का संज्ञान लेकर, अनुच्छेद 342 में जरूरी सुधार करेगी, ताकि धर्मांतरण की मार झेल रहे अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) समाज का अस्तित्व बच सके। अन्यथा, आने वाले समय में हमारे जाहेरस्थानों/ सरना स्थलों/ देशाउली में पूजा करने वाला कोई नहीं बचेगा। ऐसे तो हमारा अस्तित्व की खत्म हो जायेगा।

Tags - Champai Soren Supreme Court conversion order welcome demand from the Centre