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पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के आवास पर चला बुलडोजर, भारी पुलिस बल की मौजूदगी में घर जमींदोज

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द फॉलोअप डेस्क
पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के आवास को ध्वस्त कर दिया गया है। योगेंद्र साव की बेटी और पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने प्रशासन की इस कार्रवाई पर तीखी नाराजगी जताई। उन्होंने इसे पूरी तरह अन्यायपूर्ण बताया है। अंबा प्रसाद ने स्पष्ट किया कि वे इस मामले को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगी। इस बयान के बाद यह मामला और ज्यादा तूल पकड़ता नजर आ रहा है। हजारीबाग के केरेडारी प्रखंड के जोरदाग गांव में गुरुवार का दिन बेहद तनावपूर्ण और हलचल भरा रहा। सुबह से ही इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई थी, जिससे पूरा क्षेत्र पुलिस छावनी में तब्दील नजर आया। स्थानीय लोगों की भीड़ दूर से इस पूरे घटनाक्रम को देखती रही। इसी दौरान प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के आवास को ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई अचानक नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहे विवाद का परिणाम बताई जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, जिस जमीन पर यह आवास बना हुआ था, उसे पहले ही चट्टी बरियातू कोल खनन परियोजना के विस्तार के लिए अधिग्रहित किया जा चुका था। यह परियोजना एनटीपीसी के अधीन संचालित हो रही है, जिसे क्षेत्र के विकास और ऊर्जा उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। 
अधिकारियों का कहना है कि परियोजना में बाधा बन रही संरचनाओं को हटाना आवश्यक था, इसी के तहत यह कार्रवाई की गई। इस पूरे मामले की जड़ में मुआवजे को लेकर असंतोष बताया जा रहा है। पूर्व मंत्री योगेंद्र साव का आरोप था कि उन्हें उनकी जमीन के बदले उचित मुआवजा नहीं दिया गया। इसी मांग को लेकर वे पिछले कई दिनों से अपने परिवार के साथ धरने पर बैठे हुए थे। इस विरोध प्रदर्शन में उनकी पत्नी निर्मला देवी और बेटी अंबा प्रसाद भी बराबर की भागीदारी निभा रही थीं। परिवार का कहना था कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे जमीन नहीं छोड़ेंगे। गुरुवार को प्रशासन ने पूरी तैयारी के साथ ध्वस्तीकरण अभियान चलाया। अंचलाधिकारी की निगरानी में तीन पोकलेन मशीनों को मौके पर लगाया गया, जिन्होंने कुछ ही घंटों में पूरे मकान को जमींदोज कर दिया। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, ताकि कोई विरोध प्रदर्शन उग्र रूप न ले सके। पुलिस बल लगातार मुस्तैद रहा और पूरे ऑपरेशन को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा किया गया। कार्रवाई के बाद राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया भी सामने आने लगी है।

 

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