हजारीबाग:
कोषागार से पुलिस वेतन मद में हुई अवैध निकासी के मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ ही चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। अब तक की जांच में पता चला है कि लेखा शाखा में तैनात रहे आरक्षी शंभू कुमार, उनके सहयोगी आरक्षी रजनीश कुमार सिंह उर्फ पंकज सिंह और धीरेंद्र सिंह पिछले करीब 10 वर्षों से इस घोटाले को अंजाम दे रहे थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस दौरान लगभग 30 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की गई। यह राशि 14 से अधिक बैंक खातों में 22 बार ट्रांसफर की गई थी। कई खातों में 2 से 3 बार रकम भेजे जाने की पुष्टि हुई है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि घोटाले को सुनियोजित तरीके से लंबे समय तक अंजाम दिया गया।

बिहार के गया जिले के विभिन्न इलाकों से कनेक्शन
जांच में यह भी सामने आया है कि जिन बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए गए, वे ज्यादातर बिहार के गया जिले के विभिन्न इलाकों अनुग्रह कॉलोनी, शेरघाटी, गुरारु, गांधी मैदान और परैया स्थित एसबीआई शाखाओं में खुले थे। इससे जांच का दायरा अब झारखंड के बाहर भी फैल गया है और अंतरराज्यीय नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है। प्रारंभिक जांच के मुताबिक, पुलिस वेतन मद से फर्जी दस्तावेजों और हेरफेर के जरिए रकम निकाली गई। लेखा प्रणाली में खामियों का फायदा उठाकर भुगतान आदेश तैयार किए गए और फिर रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। लंबे समय तक इस गड़बड़ी का पता न चलना प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

हजारीबाग ट्रेजरी स्कैम पर तेज हुई बयानबाजी
वही दूसरी ओर मामले को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल ने इसे “जनता के पैसे का बड़ा घोटाला” बताते हुए कहा कि इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
कोडरमा विधायक नीरा यादव ने भी निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराकर दोषियों पर ठोस कार्रवाई की जाए। वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रवक्ता सतीश कुमार ने आरोप लगाया कि यह मामला पूर्ववर्ती सरकार के समय का है, और वर्तमान सरकार इसकी गंभीरता से जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
कांग्रेस के पूर्व विधायक प्रत्याशी मुन्ना सिंह ने भी इसे शर्मनाक बताते हुए कहा कि वेतन के नाम पर करोड़ों की निकासी होना गंभीर अपराध है और इसमें शामिल सभी लोगों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
जांच एजेंसियों पर नेटवर्क का पता लगाने का दबाव
लगातार हो रहे खुलासों के बाद अब जांच एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है कि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाए। यह भी संभावना जताई जा रही है कि इस घोटाले में सिर्फ कुछ कर्मचारी ही नहीं, बल्कि और भी लोग शामिल हो सकते हैं। इस पूरे मामले ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं आखिर 10 वर्षों तक इतनी बड़ी निकासी कैसे होती रही?निगरानी तंत्र कहां विफल हुआ? क्या इसमें और बड़े अधिकारी भी शामिल हैं?हजारीबाग ट्रेजरी घोटाला अब सिर्फ एक वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और संभावित संगठित भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और सरकार की कार्रवाई इस मामले की गंभीरता को तय करेगी।