द फॉलोअप डेस्क:
झारखंड के आकलन उत्तीर्ण और प्रशिक्षित सहायक अध्यापक (पारा टीचर) 2 दिन के सामूहिक आकस्मिक अवकाश पर चले गए हैं। सहायक अध्यापकों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है। साथ ही यह भी जानकारी दी है कि सहायक अध्यापक अब प्रदेश के सभी विधायकों और मंत्रियों के सरकारी आवास के बाहर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन करेंगे। इससे पहले रांची में राजभवन के पास नागा बाबा खटाल में सहायक अध्यापकों का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन जारी है। इन्होंने सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए दावा किया है कि प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों की हालत बिगड़ती जा रही है, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है।

24 अगस्त 2024 को हुआ था समझौता
सहायक अध्यापकों ने कहा कि 24 अगस्त 2024 को झारखंड सरकार और झारखंड सहायक अध्यापक संघर्ष मोर्चा के बीच लिखित समझौते के मुताबिक आकलन परीक्षा पास करने वाले शिक्षकों को TET के समतुल्य मान्यता मिलना था। 16 महीने बीत गए लेकिन इसे अमल में नहीं लाया गया। इनका कहना है कि परियोजना निदेशक और अध्यापक संघ के बीच भी 4 नवंबर 2025 को समझौता हुआ था, जिसका अनुपालन नहीं किया गया। पारा शिक्षकों ने कहा कि 2019 के विधानसभा चुनाव के समय महागठबंधन की सरकार बनने पर पारा शिक्षकों के स्थायीकरण और समान कार्य का समान वेतन देने का वादा किया था, लेकिन यह 6 साल बाद भी पूरा नहीं किया गया।
सहायक अध्यापकों की प्रमुख मांगें क्या हैं!
आकलन परीक्षा पास शिक्षकों को JTet के समतुल्य मान्यता, स्थायीकरण और नियमित वेतनमान संबंधी मांगों को लेकर झारखंड राज्य आकलन उत्तीर्ण प्रशिक्षित सहायक अध्यापक संगठन के बैनर तले सैकड़ों की संख्या में शिक्षक 18 अप्रैल से ही राजभवन के सामने धरना-प्रदर्शन और आमरण अनशन कर रहे हैं। कई शिक्षकों की हालत बिगड़ गई है, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है।
अब सहायक अध्यापकों की मांग है कि आकलन परीक्षा पास शिक्षकों को टेट के समतुल्य मान्यता देकर सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में शामिल होने का मौका दिया जाए। सहायक अध्यापकों को समान काम का समान वेतन दिया जाए। गौरतलब है कि 45000 शिक्षकों की ओर से यह मांगें रखी गई हैं। सहायक अध्यापकों ने बोरियो विधानसभा के विधायक धनंजय सोरेन को ज्ञापन सौंपा।