द फॉलोअप डेस्क
लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए केंद्र सरकार संसद में संशोधित बिला लाने की तैयारी कर रही है। जानकारी के अनुसार इस बिल को लाने की जिम्मेदारी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उठायी है। इसके नयी जनगणना कराने या परिसीमन करने की बाध्यता नहीं रह जाएगी। फिलहाल 2011 के जनगणना को आधार बना कर संशोधन बिला को लोकसभा और राज्यसभा से पास कराया जा सकता है। यहां मालूम हो कि पूर्व में केंद्र सरकार ने महिलाओं को आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास कराया था। लेकिन बिल के पास होने के बाद भी जनगणना और परिसीमन की शर्तों के कारण यह लागू नहीं हो सका।
.jpeg)
महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिए जाने के मुद्दे पर 23 मार्च को गृहमंत्री अमित शाह ने कई विपक्षी दलों के नेताओं के साथ मीटिंग की। संसद भवन में हुई इस बैठक में एनसीपी (एसपी) शिव सेना (यूबीटी) बीजेडी, वाईएसआरसीपी व कई अन्य दल के प्रतिनिधि शामिल हुए। हालांकि इस बैठक में संसद में मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधि भी इस बैठक में शामिल नहीं थे। अमित शाह की कोशिश है कि संशोधन बिल पर सभी दलों के साथ आम सहमति बनाया जाए। हालांकि पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से पूर्व संसद में महिला आरक्षण बिल को लाये जाने पर कुछ राजनीतिक दलों ने अप्रत्यक्ष विरोध भी करना प्रारंभ कर दिया है। जानकारी के अनुसार महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिए जाने के साथ ही लोकसभा ौर विधानसभा सीटों की संख्या में 50 फीसदी की बढोत्तरी भी होगी। इस तरह लोकसभा की सीटों की संख्या 816 हो जाएंगी। इनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
