रांची
आजसू के महासचिव संजय मेहता ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने प्रतिभा सेतु का निर्माण करने का सुझाव दिया है। इससे पूर्व भी यह सुझाव दिया गया था लेकिन पीटी की परीक्षा समाप्त होने के बाद पुनः एक रिमाइंडर सरकार को भेजा गया है। पत्र में उन्होंने लिखा है की आपका ध्यान एक अति महत्वपूर्व विषय की ओर केंद्रित करवाना चाहता हूं। यह विषय जेपीएससी की परीक्षाओं से संबंधित है। साथ ही आपसे आग्रह के साथ एक सुझाव देना चाहता हूं। उन्होंने इस महत्वपूर्ण सुझाव पर तत्काल पहल करने का अनुरोध किया है।
पत्र में उन्होंने सुझाव देते हुए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा शुरू की गई “प्रतिभा सेतु” का उल्लेख किया है। यूपीएससी ने अपनी “प्रतिभा सेतु” पहल को 2018 में शुरू किया है जिसे पहले पब्लिक डिस्क्लोजर स्कीम (पीडीएस) के नाम से जाना जाता था।

क्या है ‘जेपीएससी प्रतिभा सेतु’
यह एक डिजिटल मंच है जो उन अभ्यर्थियों की प्रोफाइल को सार्वजनिक करता है जो यूपीएससी की कठिनतम परीक्षाओं के सभी चरणों में सफल रहे। परंतु अंतिम मेरिट सूची में स्थान नहीं बना पाए। इस पहल के तहत इच्छुक अभ्यर्थी अपनी सहमति से अपनी जानकारी को सार्वजनिक करने की अनुमति देते हैं। यूपीएससी इस डेटाबेस को केंद्रीय मंत्रालयों, सरकारी निकायों और पंजीकृत निजी कंपनियों को लॉगिन आईडी और पासवर्ड के माध्यम से उपलब्ध कराता है। इसके बाद वे इन प्रतिभाशाली उम्मीदवारों तक पहुँच बनाकर उन्हें अवसर प्रदान करते हैं।
इस योजना का उद्देश्य उन प्रतिभावान उम्मीदवारों को वैकल्पिक अवसर प्रदान करना है, जिन्होंने अपनी योग्यता सिद्ध की है। लेकिन कुछ नंबरों से अंतिम चयन से चूक गए। यह पहल न केवल अभ्यर्थियों को नई संभावनाएं देता है, बल्कि देश के सरकारी और निजी संस्थानों को प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराता है। इसी तर्ज पर संजय मेहता ने ‘जेपीएससी प्रतिभा सेतु’ निर्माण करने का अनुरोध मुख्यमंत्री से किया है।

क्या होगा इससे फायदा
आजसू नेता ने कहा, यह पहल उन मेधावी अभ्यर्थियों को समर्पित होगी जो जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा या अन्य परीक्षा के सभी चरणों तक पहुँचे हों। प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार तक पहुंचने में अभ्यर्थी काफ़ी मेहनत करते हैं। कई अभ्यर्थी सिर्फ़ कुछ अंकों से अंतिम मेरिट सूची में स्थान नहीं बना पाते हैं। कुछ अंकों से चयन नहीं होने पर अभ्यर्थी काफ़ी मानसिक दबाव में होते हैं। उनके पास पुनः तैयारी का विकल्प तो है लेकिन ऐसे अभ्यर्थियों के लिए एक वैकल्पिक रास्ता हमें उपलब्ध कराना चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने लिखा है की इन प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों को राज्य सरकार के अन्य प्रशासनिक या गैर-प्रशासनिक पदों, निजी क्षेत्र की कंपनियों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में नियुक्ति का अवसर देकर हम उनकी क्षमता का उपयोग झारखंड के प्रशासनिक और विकास कार्यों में कर सकते हैं। उन्होंने लिखा है कि वैसे अभ्यर्थी, जो अंतिम चयन में मामूली अंतर से चूक जाते हैं, अत्यंत प्रतिभाशाली और प्रशिक्षित होते हैं। “जेपीएससी प्रतिभा सेतु” इन्हें एक वैकल्पिक रास्ता भी देगा। यह पहल झारखंड के युवाओं को उनके सपनों को साकार करने का एक सुनहरा अवसर प्रदान करेगी। राज्य के सरकारी व निजी क्षेत्रों को कुशल मानव संसाधन भी उपलब्ध कराएगी। संजय मेहता ने इस प्रस्ताव पर विचार करने और इसे लागू करने के लिए अनुरोध किया है। आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है।

मानव संसाधन को अन्य माध्यमों के माध्यम से सेवा का अवसर मिले
संजय मेहता ने बताया की वैसे अभ्यर्थी जो पीटी, मेंस, इंटरव्यू के बाद चंद अंकों से अंतिम रूप से चयन होने से चूक जाते हैं वे प्रतिभाशाली अभ्यर्थी होते हैं। उनके हौसले को बनाये रखना जरूरी है। उस मानव संसाधन को अन्य माध्यमों के माध्यम से सेवा का अवसर दिया जाना चाहिए।
इनका एक डेटाबेस तैयार कर झारखंड सरकार अभ्यर्थियों की सहमति से सार्वजिक करे। यूपीएससी इस डेटाबेस को केंद्रीय मंत्रालयों, सरकारी निकायों और पंजीकृत निजी कंपनियों को लॉगिन आईडी और पासवर्ड के माध्यम से उपलब्ध कराता है। यही पैटर्न अपनाते हुए जेपीएससी ऐसा एक प्लेटफॉर्म तैयार करे। जेपीएससी प्रतिभा सेतु निर्माण के साथ इसे देश के अन्य राज्य सरकारों, निकायों, डेवलपमेंट सेक्टर के संस्थाओं के साथ साझा किया जाए। जिससे इन्हें अन्य अवसर प्राप्त हो सके।
