'टैगोर एक मानवतावादी विचारक थे और गांधी एक धर्मपारायण।
''आपको सरकारी दादा साहब फाल्के पुरस्कार और मुंबइया दादा साहब फाल्के पुरस्कार के अंतर को समझना होगा।
'सेब न्यूटन के सिर पर ही गिरा कि नहीं यह तो इतिहास स्पष्ट नहीं करता।
उइगर मुसलमानों के साथ चीन की प्रताड़ना जग-जाहिर है। लेकिन क्या कभी पाकिस्तान में इसके खिलाफ विरोध के स्वर उठे।
भारत में प्रतिभा का अकाल पड़ने की एक बड़ी वजह यह है कि हमने देश की कम से कम 80 फीसदी आबादी के अन्दर पैदा होने वाली प्रतिभाओं को पनपने लायक सिस्टम नहीं तैयार किया है।
एक खूँखार शासक, तानाशाह, अय्याश और आतंकवादी- गद्दाफी का नाम सुनते सामान्य मस्तिष्क में सबसे पहले यही शब्द तो गूंजते हैं।
'उर्दू और हिंदी दोनों ठेठ भारतीय भाषा है। दोनों का उदय भी लगभग एक साथ ही हुआ। बाद में दोनों की राह अलग-अलग हो गई।
'कभी चंबल की बीहड़ों में दहशत रहीं फूलन देवी ने अस्सी के दशक में आत्मसमर्पण किया। जेल की सजा भी भुगती। बाद में सामाजिक सेवाओं में समय दिया। समाजवादी पार्टी कीसांसद भी बनीं।
'यह कहानी चिंदी नाम की उस लड़की की है, जिसका जनम 14 नवंबर 1948 को महाराष्ट्र के वर्धा में हुआ था।
जातीय अहंकार एक तरह की मानसिक बीमारी है। खासकर तब जब आपका जातीय इतिहास वर्चस्व और शोषण का रहा हो।
जिंदगी एक नई जंग है। संघर्ष की दास्तां है यह।
संघ के प्रभाव वाली नरेंद्र मोदी की सरकार ने जाति आधारित जनगणना कराने से इनकार कर दिया