इन आंकड़ों को देखिये, 30% सोना — माली, बुर्किना फासो, घाना, तंज़ानिया —सोना नदियों की तरह बहता है, लेकिन लोग गरीबी में तैरते हैं।
बिहार और देश भर में मतदाता पुनरीक्षण (SIR) पर छिड़े संग्राम के बीच देश के नेता प्रतिपक्ष 'राहुल गांधी' बिहार आ रहे हैं। वैसे तो उनका कार्यक्रम 9-10 अगस्त से ही तय था लेकिन अब वे अपने दौरे की शुरुआत 17 अगस्त को करेंगे।
आज झारखंड आंदोलन के प्रखर सेनानी, जन-जन के नेता, और राज्य सरकार में पूर्व शिक्षा मंत्री स्वर्गीय टाइगर जगरनाथ महतो की जयंती पर समूचा झारखंड उन्हें नम आंखों से याद कर रहा है।
छत्तीसगढ़ के बस्तर और सरगुजा से लेकर झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों तक फैले आदिवासी समाज में उत्तराधिकार का अधिकार अब तक पुरुषों तक सीमित रहा है। ‘हमारी बहन-बेटियाँ हमारी अमानत हैं, लेकिन ज़मीन पर उनका हक नहीं’ यह कथन कई आदिवासी समुदायों की
अगर आप सोचते हैं कि अंग्रेजी ही एक ऐसी भाषा से जिससे दुनिया में लोगों से बात कर सकते हैं तो आप यहां पर थोड़े से गलत हो सकते हैं।
RSS प्रमुख मोहन भागवत का हाल में दिया गया बयान चर्चा में है। जिसमें उन्होंने 75 की उम्र के बाद दूसरों को मौका देने की बात कही है। इस बयान ने देश की सियासी हलचलों को हवा दे दी है और ये बयान जंगल में आग की तरह फैल रहा है।
RSS प्रमुख मोहन भागवत का हाल में दिया गया बयान चर्चा में है। जिसमें उन्होंने 75 की उम्र के बाद दूसरों को मौका देने की बात कही है। इस बयान ने देश की सियासी हलचलों को हवा दे दी है और ये बयान जंगल में आग की तरह फैल रहा है।
प्रधानमंत्री से लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को इज ऑफ डूइंग बिजनेस का मुहावरा पसंद है। इज ऑफ डूइंग बिजनेस यानि एक ऐसी दुनिया की कल्पना है जिसमें प्रक्रियाएं तेज़ हों, अनापत्ति प्रमाणपत्र ऑनलाइन मिलें, और ज़मीन के कागज़ एक क्लिक पर ट्रांसफर हो जाएं।
चिंगारी कोई भड़के, तो सावन उसे बुझाये। ये आनंद बख्शी की लिखी लाइन है। लेकिन बिहार की सियासत में जो चिंगारी चिराग पासवान और जीतन राम मांझी के बीच भड़की है, उसे यहां कि झमाझम बारिश भी नहीं बुझा पा रही। चुनाव की तरफ बढ़ रहा बिहार का सियासी मिजाज दिन प्रतिदिन
राजमहल के पहाड़ियों को यदि पता होता कि सिराजुद्दौला और उसके साथियों की लड़खाड़ती और थकी चाल को संभालने से उनकी आने वाली पीढ़ी की आज़ादी बहाल रहती तो संभव था कि उनका व्यवहार कुछ और होता। सत्रहवीं सदी के मध्य में देश के हालात क्या थे, उन्हें नहीं पता था।उन्हें ज
पटना विश्वविद्यालय आजकल चर्चा के केंद्र में है, अच्छी शिक्षा, गुणवत्ता पूर्ण प्रशिक्षण और कभी विचार विमर्श का केंद्र कहा जाने वाला ये विश्वविद्यालय अब सेशन लेट, संसाधनों की कमी जैसी कई समस्याओं से जूझ रहा है। कभी ऑक्सफोर्ड कहे जाने वाले इस विश्वविद्यालय स
पटना का अटल पथ तो जैसे खूनी पथ हो गया है। तेज और बेतहाशा रफ्तार से चलने वाली गाड़ियां किसी को भी कुचलते हुए आगे बढ़ सकती हैं। न प्रशासन का कोई खौफ और न ही सरकार बहादुर का, तिस पर से गाड़ी पर यदि सत्तारूढ़ दल (भाजपा) का झंडा लगा हो तब तो जनता खुद को बचाकर