मुफलिसी, दिव्यांगता और संघर्ष को मात देकर एशियन पैरा गेम्स में जीता ब्रॉन्ज
क्या BLOs इतनी दूर-दराज़ बस्तियों तक पहुंच भी पाएंगे? और अगर पहुंच भी गए, तो क्या आदिवासी परिवारों के पास अपनी पहचान साबित करने के लिए दस्तावेज मौजूद हैं?
देशभर में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर बीएलओ—यानी बूथ लेवल ऑफिसर्स, की हालत लगातार चर्चा में है।
मर्यादा पुरुषोत्तम राम मात्र धार्मिक आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि लोकमंगलकारी भारतीय चिंतन और नैतिकता के प्रतीक भी हैं। उनके जीवन की घटनाएं, निर्णय और व्यवहार आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक हैं।
फ़र्ज कीजिए कि झारखंड के किसी जंगल में ग्राम सभा की मीटिंग की। गाँव के लोग चर्चा कर रहे हैं कि अब उनके जंगल का “कार्बन” भी बिकेगा। न लकड़ी, न बाँस, अब तो पेड़ों में जमा कार्बन भी एक संपत्ति बन चुका है, जिसे कार्बन क्रेडिट कहा जा रहा है।
सीट बंटवारे पर सहमति बनने के बाद जहां बीजेपी और जेडीयू ने बराबर-बराबर 101 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया था, वहीं अब नीतीश कुमार के कदम ने इस समझौते की जड़ें हिला दी हैं।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान 31 अगस्त 2025 को पटना में बूथ लेवल अधिकारी (BLO) मतदाताओं के दस्तावेज़ों की जांच करते हुए।
नीति आयोग की एक नई रिपोर्ट ने भारत के रोजगार बाज़ार को लेकर एक साथ चेतावनी और उम्मीद दोनों पेश की है। रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले पांच वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से देश के टेक सेक्टर से करीब 20 लाख नौकरियां खत्म हो सकती हैं।
संसार में रहते हुए भी ईश्वर के साथ एकात्मता: लाहिड़ी महाशय का प्रेरणास्पद जीवन, योगावतार जिन्होंने हमारे मध्य विचरण किया।
आपके अंतर्मन को झकझोर देने वाली यह एक सच्ची कहानी है। ज़रा सोचिए, जब 15 अगस्त 1947 को भारत जैसे 35 करोड़ की आबादी वाले देश को आज़ादी मिली, तो उसके कुछ ही दिन बाद 20 लाख से अधिक लोगों को आज़ाद न किया गया। जिस वक्त पूरा देश जश्न में डूबा था, उस समय एक पूरा
दीमा हसाओ का उदाहरण झारखंड के लिए सबक है। पिछले दिनों गुवाहाटी उच्च न्यायालय उस समय स्तब्ध रह गया जब यह सामने आया कि असम सरकार और दीमा हसाओ स्वायत्तशासी जिला परिषद (एनसीएचएसी) ने कोलकाता की महाबल सीमेंट कंपनी को 3,000 बीघा (लगभग 992 एकड़) ज़मीन आवंटित कर
दीमा हसाओ का उदाहरण झारखंड के लिए सबक है। पिछले दिनों गुवाहाटी उच्च न्यायालय उस समय स्तब्ध रह गया जब यह सामने आया कि असम सरकार और दीमा हसाओ स्वायत्तशासी जिला परिषद (एनसीएचएसी) ने कोलकाता की महाबल सीमेंट कंपनी को 3,000 बीघा (लगभग 992 एकड़) ज़मीन आवंटित कर