द फॉलोअप डेस्क
महिला आरक्षण का मुद्दा अब तेजी से गरम होता दिखाई दे रहा है। दरअसल सोशल मीडिया पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो महिलाओं को आरक्षण देने की बात करते हुए नजर आ रहे हैं। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर वीडियो के साथ कैप्सन भी लिखा। जिसमें उन्होंने लिखा कि दशकों से सड़क से लेकर संसद तक हमारी यह मांग रही है कि महिला आरक्षण विधेयक पारित करिए लेकिन महिला आरक्षण के अंदर SC/ST और Minority वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण होना चाहिए। लालू यादव ने कहा कि इस देश की संस्कृति को महिलाओं ने आगे बढ़ाने का काम किया है। इसलिए हम उन्हें 15 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग करते हैं। हम आरक्षण के पक्षधर हैं।
दशकों से सड़क से लेकर संसद तक हमारी यह मांग रही है कि महिला आरक्षण विधेयक पारित करिए लेकिन महिला आरक्षण के अंदर ????????/????????, ???????????? और ???????????????????????????????? वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण होना चाहिए।#LaluYadav #Womenreservation #RJD pic.twitter.com/Kvbhdwpkql
— Lalu Prasad Yadav (@laluprasadrjd) April 17, 2026
तेजस्वी ने लगाए गंभीर आरोप
हालांकि आज बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार पर महिला आरक्षण को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार को घेरत हुए कहा कि सरकार इस बिल की आड़ में परिसीमन लागू करने की फिराक में है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए यह खतरा है। उन्होंने कहा कि इस बिल में डिलीमिटेशन को बड़ी चालाकी से लाया गया है। तेजस्वी ने आगे कहा कि महिला आरक्षण तो लालू प्रसाद यादव सहित समाजवादी नेताओं की मांग रही है। यह सर्वसम्मति से पहले से ही लागू है।

33% नहीं बल्कि 50% महिला आरक्षण
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सिर्फ 33% नहीं बल्कि 50% महिला आरक्षण के पक्षधर हैं। लेकिन उनकी मांग है कि महिला आरक्षण के भीतर SC/ST और OBC वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण होना चाहिए, तभी यह न्यायपूर्ण होगा। इस दौरान उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 2023 में सर्वसम्मति से महिला आरक्षण पारित हुआ। मोदी सरकार ने कहा कि इसे नई जातिगत जनगणना और परिसीमन के उपरांत 2034 में लागू करेंगे। लेकिन 3 सालों तक इस विधेयक को अधिसूचित तक नहीं किया, जिससे सरकार की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बीजेपी, महिला आरक्षण को आगे करके चालाकि से परिसीमन, संविधान बदलने, लोकतंत्र खत्म करने एवं संघीय ढांचे को कमजोर करना चाहती है। इसके अलावा ऐसे ऑप्टिक्स के ज़रिए ये समय-समय पर जनभावना का भी परीक्षण करते रहते है।