द फॉलोअप डेस्क
राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने आज सोशल मीडिय़ा पर एक पोस्ट किया। उन्होंने अपने पोस्ट में 21 वर्षों की NDA सरकार की कमियां गिनवाते हुए लिखा कि देश के हर सूचकांकों में सबसे पीछड़ा राज्य बिहार है। इस दौरान तेजस्वी यादव ने बिहार में प्रति व्यक्ति आय, शिक्षा, बेरोजगारी, गरीबी,पलायन समेत कई कमियां दिखाते हुए पोस्ट किया। आगे तेजस्वी यादव ने सरकार पर सवाल उठाते हुए लिखा कि गंभीरता से इस पर मनन करना चाहिए और बताना चाहिए कि 21 वर्षों के एनडीए शासन के बाद भी बिहार, विकास के इन सभी संकेतकों में राष्ट्रीय औसत से अत्यधिक कम क्यों है? जब तक आप समस्या को चिह्नित कर उसका समाधान नहीं करेंगे तब तक अपनी असफलता छुपाने के लिए हर बार ऐसे ही चुनावों में चुनाव आयोग जैसी संस्था, भ्रष्ट अधिकारियों की चौकड़ी, सरकारी तंत्र का दुरुपयोग और मदद, 10 हज़ार नगद और 1 करोड़ नौकरी और हर महिला को 2 लाख रुपए बांटने जैसे सफेद झूठ बोलना पड़ेगा।

उन्होंने आगे लिखा कि 21 वर्षों की NDA सरकार और 12 वर्षों की डबल इंजन सरकार के कर कमलों से विगत दो दशकों से शिक्षा-रोजगार-आय, औद्योगिक विकास-उत्पादन व निवेश तथा स्वास्थ्य सेवा-सुविधा और पोषण से लेकर अधिकांश सामाजिक, मानवीय और आर्थिक संकेतकों में बिहार सबसे निचले पायदानों पर है। बिहार को सबसे पिछड़ा और गरीब राज्य बताने पर भ्रष्ट शासकों को अपमान लगता है क्योंकि यह इनके सफेद झूठ व अपार असफलता का पर्दाफाश कर इनकी सच्चाई को उजागर करता है इसलिए एनडीए के कर्णधारों को यह असहनीय दर्द-पीड़ा होती है। दरअसल, तेजस्वी यादव हाल ही में केरल यात्रा पर थे जहां वे मंच पर अंग्रेजी में भाषण दे रहे थे। इसी दौरान उन्होंने बिहार राज्य की चर्चा की थी। अपने भाषण में तेजस्वी यादव बिहार को पूवर स्टेट कहा था। हालांकि इसके बाद विपक्ष द्वारा तेजस्वी को अंग्रजी ठीक करने और बिहार की कमियां गिनवाने पर भी असंतोष जताई गई थी। तेजस्वी यादव ने यह पोस्ट विपक्ष के टिप्पणी के बाद लिखा।

तेजस्वी ने अपने पोस्ट में विपक्ष को घेरते हुए आगे लिखा कि बिहार की यह स्थिति 21 वर्षों से बनी हुई है लेकिन निर्लज्ज, नाकाम, नकारा और निक्कमी सरकार हर बात में विपक्ष पर दोषारोपण कर अपनी राजक नीतियों, सफेद झूठ और खोखले दावों के बोझ तले अपनी आसमानी विफलता को छुपाने का असफल प्रयास करती है। अगर मुख्यमंत्री, दो-दो उपमुख्यमंत्री में नैतिक साहस और योग्यता है तो बिहार की प्रगति व बेहतरी के लिए इस यथार्थ और सरकार के अपने ही आंकड़ों व तथ्यों पर मुझसे जब चाहे, जहाँ चाहे, जैसे चाहे सार्वजनिक बहस कर सकते हैं।