द फॉलोअप डेस्क
मिडिल ईस्ट में हो रहे विवादों के कारण भारत में पहले रसोई गैस की किल्लत देखने को मिली। उसके बाद तेल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल के दाम बढ़ाए और अब कोल्ड स्टोरेज में इस्तेमाल होने वाली अमोनिया गैस की कीमतों में भी बढ़ोतरी कर दी गई है। जिससे कोल्ड स्टोरेज संचालकों की चिंता बढ़ गई है। कोल्ड स्टोरेज संचालकों का कहना है कि जहां पहले अमोनिया गैस 75 रू. किलो मिल रही थी वहीं अब दामों में बढ़ोतरी करते हुए 110 रू. प्रति किलो कर दी गई है यानि की कुल 42रू. की बढ़ोतरी की गई है। बता दें कि वर्तमान में समस्तीपुर में कुल 32 कोल्ड स्टोरेज का संचालन किया जा रहा है। कोल्ड स्टोरेज में तापमान नियंत्रित रखने के लिए अमोनिया गैस का उपयोग किया जाता है। अब ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने के बाद लागत पर असर पड़ना स्वाभाविक है। सूत्रों के अनुसार एक सिलिंडर में 60 किलो अमोनिया गैस आती है और रोजाना एक कोल्ड स्टोरेज में औसतन पांच किलो की खपत होती है। इस तरह, जिले के 32 कोल्ड स्टोरेज में प्रतिदिन 160 किलो अमोनिया खर्च होती है।
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कोल्ड स्टोरेज संचालकों ने बताया कि आर्डर देने के बाद भी आपूर्ति दो दिनों के बाद हो रही है। उनका कहना है कि अगर ये परेशानी लंबे समय तक बनी रहती है तो आलू पर संकट गहराने लगेगा, क्योंकि आलू को सुरक्षित रखने के लिए ठंडक देने में अमोनिया का प्रयोग होता हे। यदि 24 घंटे अमोनिया से ठंडक न दी जाए तो आलू खराब हो जाएगा। दरअसल, मार्च से दिसंबर तक निर्धारित आलू भंडारण सीजन के लिए प्रत्येक कोल्ड स्टोरेज संचालक अमोनिया गैस का 20 से 30 सिलिंडर खरीदता है, ताकि गैस कम न पड़े। भंडारण में गैस रिसाव के खतरे के कारण ज्यादातर संचालक प्रत्येक दो महीने के हिसाब से खरीद करते हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस साल करीब 30 हजार हेक्टेयर में 7.50 लाख मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हुआ है। कोल्ड स्टोरेज संचालक अमरेन्द्र झा ने किसानों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालने की बात कही है। उनका कहना है कि अभी आलू भंडारण के किराये में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की गई है। किसानों से पहले की तरह ही शुल्क लिया जा रहा है। वहीं कोल्ड स्टोर संचालक धर्मेंद्र साह ने बताया कि हर साल फरवरी में भंडारण दर तय की जाती है और इस वर्ष का रेट पहले ही निर्धारित हो चुका है। ऐसे में तत्काल किराया बढ़ाना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि मार्च से अक्टूबर तक आलू भंडारण का पीक सीजन रहता है।