बिहार
बिहार में पंचायत चुनाव-2026 को लेकर तैयारी तेज है। इधर, मुखिया महासंघ द्वारा चुनाव आयोग से परिसीमन की मांग भी तेज हो गई है। मुखिया महासंघ ने यहां तक कहा कि अगर पंचायतों में समय रहते न्यायसंगत परिसीमन और आरक्षण लागू नहीं होता है तो वे राज्य भर में आंदोलन करेंगे। दरअसल इसकी जानकारी शुक्रवार को मुखिया महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय और पंच-सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष अमोद कुमार निराला ने प्रेस वार्ता कर दी।

दो महीने का अल्टीमेटम
इस दौरान उन्होंने चेतावनी देते हुए दो महीने का अल्टीमेटम भी दिया और कहा कि अगर तय समय क अंदर आयोग द्वारा कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो राजव्यापी धरना देने की बात कही। उनका आरोप है कि वर्तमान पंचायत परिसीमन पूरी तरह से त्रुटीपूर्ण, असंवैधानिक और जनसंख्या मानकों के विपरीत है। याचिका में मांग की गई थी कि पंचायतों का परिसीमन नए सिरे से किया जाए और राज्य में 2022-2023 की जाति आधारित सर्वेक्षण के आधार पर आरक्षण लागू किया जाए।

छह पदों के लिए होंगे चुनाव
निर्वाचन आयोग के सचिव मुकेश कुमार सिन्हा ने इस साल के अंत में होने वाले पंचायत चुनाव को लेकर सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारी और पंचायत सह जिलाधिकारियों को यह निर्देश दिया है कि वो 2011 की जनगणना के आधार पर ही प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए प्रपत्र-1 का प्रारुप तैयार करें। चुनाव आयोग के अनुसार, प्रपत्र-1 में जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, मुखिया, सरपंच, पंचायत और पंच जैसे छह पदों के लिए चुनाव होगा। चुनाव आयोग का कहना है कि इसमें संबंधित क्षेत्रों की जनसंख्या, पंचायत का नाम, वार्ड, और अन्य सभी विवरण पूरी तरीके से डिजिटल फॉर्म में होगा और सभी आंकड़े वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा।

उम्मीदवार 11 मई तक दर्ज करा सकते हैं आपत्तियां
दरअसल चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उम्मीदवार, चुनाव से संबंधित आपत्तियां 27 अप्रैल से 11 मई तक कर सकते हैं। 27 अप्रैल से 14 मई तक आपत्तियों का निबटारा कर दिया जाएगा। वहीं अंतिम रुप से प्रपत्र-1 का प्रकाशन 25 मई को होगा। साथ ही जिला गजट में इसका प्रकाशन 29 मई को किया जाएगा।