द फॉलोअप डेस्क
बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर के वर्तमान कुलपति डॉ.दुनिया राम सिंह के द्वारा विश्वविद्यालय में की गयी वैज्ञानिकों, शिक्षकों और कई शिक्षकेतर पदों पर की गयी नियुक्ति की प्रक्रिया में धांधली, प्रशासनिक और अकादमिक अनियमितताओं के सम्बन्ध में दिनांक- 26.09.2025 को प्रेस कॉंन्फ्रेंस के माध्यम से साक्ष्य सहित एवं पत्र के माध्यम से जानकारी मुख्यमंत्री और महामहिम राज्यपाल सह कुलाधिपति महोदय, बिहार को दिया। इसके बावजूद बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति के विरुद्ध गठित आरोपों के सम्बन्ध में अब तक कोई जांच/कार्रवाई नहीं होना कुलपति के भ्रष्टाचार और अनियमितता को बढ़ावा देने जैसा प्रतीत हो रहा है।

हाल ही में कुलपति के विरुद्ध कई अन्य गंभीर भ्रष्टाचार के मामले सामने आये हैं –
1. कुलपति ने अपने बेटी अमिता सिंह को बिज़नेस मैनेजर के पद पर नियुक्त करने के लिए उस पद की अहर्ता और मानदेय में मनमाने तरीके से बदलाव करते हुए मेधावी अभ्यर्थी के स्थान पर अल्प योग्यता वाली अपनी बेटी की महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त किया है। कुलपति ने SABAGRI योजना अंतर्गत इन्क्यूबेशन सेंटर में बिज़नेस मेनेजर के लिए निर्धारित मानदेय 30,000/- रुपये से बढाकर 1,25,000/- रुपया कर दिया। यही नहीं कुलपति की बेटी उक्त पद पर योगदान के उपरांत कभी भी नियमित सेवा नहीं दे रही है। महीने में मुश्किल से 02 से 05 दिन की उपस्थिति पर 1,25,000/- का भुगतान उन्हें पिछले 03 वर्ष से किया जा रहा है जो सरकारी राजस्व का गबन है।
2. विश्वविद्यालय में संविदा के आधार पर मानव सेवा प्रदान करने वाली एजेंसी Lions Force Solution India Pvt. Ltd, Noida में कुलपति के बेटे आदर्श कुमार और इनके करीबी रिश्तेदार साझेदार है। निविदा प्रक्रिया में अन्य सभी एजेंसी के बेहतर होने के बावजूद एक ही दर पर सेवा प्रदान करने की शर्त के बावजूद निविदा प्रक्रिया में घपला करते हुए अपने रिश्तेदार को विश्वविद्यालय में सेवा के लिए चयन किया गया जो घोर अनियमितता का परिचायक है।
3. उक्त एजेंसी द्वारा प्रतिमाह संविदा कर्मी के वेतन से अवैध तरीके से एक निश्चित राशि लेवी के रूप में काटी है और लगभग 25 लाख रूपये राशि प्रतिमाह लेवी के रूप में सीधे कुलपति और उनके रिश्तेदार को प्राप्त होता है। किशनगंज के सांसद महोदय ने भी उक्त मामले को जोरदार तरीके से उठाया है जो गंभीर जांच का विषय है।
4. कुलपति द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक (विषय वस्तु विशेषज्ञ) के नियमित पद पर विज्ञापित विज्ञापन संख्या 02/2023 दिनांक– 28.02.2023 द्वारा Agronomy विषय अंतर्गत 07 पद के स्थान पर 08 अभ्यर्थियों को नियुक्त किया है। यह देखते हुए कि उनके करीबी राम नरेश (उत्तर प्रदेश) का चयन मेधा के अनुसार किया जाना नामुमकिन है, उन्होंने एक अतिरिक्त पद पर मनमाने तरीके से नियुक्त कर मोटी धनराशि प्राप्त की है। इस तरह एक UR के विज्ञापित पद पर दो अभ्यर्थी संजू कुमारी और राम नरेश को नियुक्त कर दिया गया है ।
5. कृषि विभाग के मंत्री के निर्गत निदेश पत्रांक– 3346 दिनांक 13.08.2024 एवं सरकार के पत्रांक -1442 दिनांक 20.03.2025 द्वारा बिहार कृषि विश्वविद्यालय स्तर के नियमित और संविदा पदों की सभी नियुक्ति पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाए जाने के बावजूद कुलपति द्वारा अपनी धृष्टता दिखाते हुए प्रशाखा पदाधिकारी, सहायक कुलसचिव और निदेशक कार्य एवं संयंत्र जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अपने चहेते लोगों को मोटी धनराशि लेकर नियुक्ति कर दिया गया है।

6. सरकार द्वारा विश्वविद्यालय स्तर से कुलपति द्वारा की गयी नियुक्ति प्रक्रिया में भारी अनियमितता को देखते हुए सभी नियमित पदों की नियुक्तियों को BPSC या अन्य सरकारी आयोग से कराये जाने सम्बन्धी विधेयक विधानमंडल से पारित होने के बावजूद कृषि विभाग के अधिकारीयों की उदासीनता की वजह से लंबित है।
7. तत्कालीन कृषि मंत्री, बिहार सरकार द्वारा वर्तमान कुलपति पर लगातार नियुक्ति प्रक्रिया में भारी धांधली, प्रशासनिक, वित्तीय एवं अकादमिक अनियमितता की गंभीरता को देखते हुए दो बार जांच समिति का गठन पत्रांक – कृ. शि. को.- 4973 दिनांक – 21.11.2024 एवं कृ. शि. को. -59/2024 -2629 दिनांक 23.05.2025 गठित किया गया। परन्तु विभाग के कुछ पदाधिकारियों की मिलीभगत के कारण उक्त जांच कार्रवाई को अब तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है और कुलपति को बचाने का काम कर रहे है।
8. कुलपति ने सरकार द्वारा वेतनमद के लिए प्रदत्त लगभग 15 लाख रूपये से अधिक अपने चहेते करीबी डॉ. एच्. पी. सिंह के NGO – “Confederation of Horticulture Association of India (CHAI)” को राशि प्रदान की है जो सरकारी राजस्व का सरासर गबन हैं।
9. यह भी जानकारी प्राप्त हुई है कि उक्त विज्ञापन संख्या 02/2023 दिनांक– 28.02.2023 में कोटि के चयन हेतु विश्वविद्यालय के परिनियम द्वारा M.Sc के अंक में निर्धारित 55% के स्थान पर 50% यानी 5% छुट का जिक्र जानबूझकर अंकित नहीं किया गया ताकि कम से कम अभ्यर्थी SC/ST कोटि के उम्मीदवार नियुक्त हो सके। उक्त नियुक्ति प्रक्रिया में अंततः अभ्यर्थी की कमी के कारण 06 पद रिक्त रह गया।
10. कुलपति ने वैज्ञानिक/सहायक प्राध्यापकों के लगभग 300 पदों पर की गयी नियमित नियुक्ति में सरकार द्वारा निर्धारित आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं किया गया है । दुसरे राज्य के महिला अभ्यर्थियों को UR(Female) के आरक्षण का लाभ दिया गया है। यही नहीं EBC कोटि के अभ्यर्थियों को EWS कोटि के रिक्त पद पर चयन किया गया है। फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र पर अनुभव का लाभ देते हुए कुलपति ने अपने चहेते लोगों को नियुक्त किया गया है जो बेहद गंभीर मामला है और उच्च स्तरीय जांच अपेक्षित है।

11. कुलपति द्वारा विश्वविद्यालय में एक करोड़ 75 लाख रूपये की कीमत का Plant Phenotype system with Camera के खरीद फरोख्त में भरी अनियमितता बरती गयी। उक्त मशीन की खरीद के लिये निर्धारित मानदंडो का पालन नहीं किया गया है और बाज़ार मूल्य से ज्यादा मूल्य पर खरीद की गयी है। मशीन को उपयोग में लाने के लिए एजेंसी को मशीन का भुगतान करने से पूर्व एजेंसी द्वारा विश्वविद्यालय के दो वैज्ञानिक को जर्मनी में प्रशिक्षण दिलाया जाना था। परन्तु कुलपति द्वारा वैज्ञानिकों को प्रशिक्षण दिलाये बिना ही एजेंसी को एक करोड़ 75 लाख रूपये का भुगतान कर दिया गया और मोटी धनराशि कमीशन के रूप में प्राप्त किया ।
12. डॉ. अनिल कुमार सिंह, निदेशक अनुसंधान की अध्यक्षता में ही NICRA एवं CRA प्रोजेक्ट अंतर्गत सभी UR कोटि के पद पर चयनित Research Associate, Technical Assistant एवं Young Professional के पद पर ज्यादातर अपने करीबी लोग खासकर मिर्जापुर जिला, उत्तरप्रदेश के लोगों को नियुक्त कर लाभ पहुचाया गया है।
13. इसी प्रकार कुलपति ने विश्वविद्यालय में पेटेंट के नाम पर कृषि अनुसन्धान में एक बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया है। कुलपति और उनके रिश्तेदार डॉ. अनिल कुमार सिंह, निदेशक अनुसंधान ने मिलकर एक ही वर्ष में विश्वविद्यालय के लाखो रूपये खर्च करके अपने नाम पर 20 से अधिक पेटेंट को बिना अनुसंधान कार्य एवं प्रयोगशाला में गए बिना अन्य वैज्ञानिकों की सहायता से हासिल कर लिए। ये दोनों पूर्व की 20 से 25 वर्षों की सेवा में एक भी पेटेंट हासिल नहीं कर सके परन्तु बिहार कृषि विश्विद्यालय के वैज्ञानिको के मेहनत से हासिल पेटेंट में अपने को जोड़कर अपना उल्लू सीधा करने में सफल हुए है। आज विश्वविद्यालय की 20 से 25 लाख रूपये सरकारी राशि बर्बाद होने के बावजूद विश्वविद्यालय के नाम पर एक भी पेटेंट नहीं है जिसकी जांच आवश्यक है।
14. सबसे बड़ी बात है कि कुलपति डॉ. दुनिया राम सिंह के विरुद्ध पूर्व विश्वविद्यालय CSUAT, Kanpur में कई अनियमिता के आरोपों की SIT जांच में उनके दोषी पाए जाने के आलोक में उनके विरुद्ध उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अपराधिक कार्यवाई दर्ज करने पर विचार किया गया। SIT जांच में पर दोषी पाए गए व्यक्ति को समान पद पर कैसे बनाये रखा जा सकता है।
15. वर्ष 2012 में सहायक प्राध्यापक के भर्ती घोटाले में नामजद अभियुक्त और वर्तमान में जमानत पर चल रहे डॉ. मुकेश कुमार वाधवानी को वर्तमान कुलपति द्वारा पहले निदेशक प्रशासन का पद भार दिया गया और उनसे हाल ही में 300 पदों पर वैज्ञानिक/ सहायक प्राध्यापक के नियमित नियुक्ति हेतु नियुक्ति पत्र निर्गत कराया गया और नियुक्ति प्रक्रिया में भारी धांधली की गयी। बाद में पारितोषिक के रूप में उनको College of Agri Business Administration, Sabour का प्रिंसिपल बना दिया गया जो अत्यंत गंभीर मामला है।
16. ऐसे ही एक अन्य अभियुक्त अमित कुमार, उप निदेशक प्रशासन जो वर्ष 2012 में सहायक प्राध्यापक के नियुक्ति घोटाले में जेल गए थे और वर्तमान में जमानत पर विश्वविद्यालय में कार्यरत है, उनको कुलपति द्वारा उच्च न्यायलय पटना के निर्देश के बावजूद हाल ही में MACP वेतन उत्क्रमण का विशेष लाभ दिया जाता है और बदले में उनसे मनमाना नीतिगत निर्णय का कार्य कराया जाता है।