द फॉलोअप डेस्क
मिडिल ईस्ट में हो रहे युद्ध के दौरान इराक में मारे गये सन्हौला प्रखंड के रानी बामिया गांव निवासी मरीन इंजीनियर देवनंदन प्रसाद सिंह का पार्थिव शरीर 18 दिन बाद बुधवार रात भागलपुर पहुंचा। देवनंदन प्रसाद सिंह का पार्थिव शरीर जब उनके घर पहुंचा, तो पूरा इलाका गमगीन हो गया। देवनंदन की पार्थिव शरीर मशाकचक स्थित आवास पर लाया गया। जैसे ही ताबूत घर के आंगन में पहुंचा, परिजनों के सब्र का बांध टूट गया। ताबूत खुलते ही चीत्कार और सिसकियों से पूरा घर गूंज उठा। पत्नी, पुत्री और अन्य परिजन फूट-फूट कर रोने लगे। हर आंख नम थी और हर चेहरा गम में डूबा हुआ। हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार परिजनों ने मृतक को तुलसी दल और गंगाजल अर्पित कर अंतिम विदाई दी। इसके बाद देर रात ही शव को बरारी गंगा घाट ले जाया गया, जहां पूरे विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। । सूत्रों के मुताबिक, देवनंदन प्रसाद अपने पीछे पत्नी, एक पुत्र क्षितिज जो जापान में इंजीनियर हैं और एक पुत्री कोमल जो इन दिनों एमबीबीएस कर रही है, छोड़ गए।

परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार देवनंदन एक अमेरिकी कंपनी में काम करते थे। उस कंपनी में वे चीफ असिस्टेंट इंजीनियिर पद पर कार्यरत थे। पिछले कई वर्षों से वे ऑफिस ड्यूटी पर ही रहते थे। 11 मार्च को अमेरिकी जहाज इराक के बसरा बंदरगाह पर पहुंचा था। यहां से जहाज में तेल लोड करने के बाद जहाज सिंगापुर जाना था। तेल लोड कर जहाज सिंगापुर के लिए रवाना हो गया था। इसी बीच खोर अल जुबैर पोर्ट के पास तेल लोड करते ही बारूद से भरे एक मोटरबोट ने जहाज में टक्कर मार दी।

परिजनों का कहना है कि घटना के वक्त जहाज पर कुल 28 लोग सवार थे लेकिन उनमें से सिर्फ देवनंदन की ही मौके पर मृत्यु हुई।
परिजनों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जब मिडिल ईस्ट की हालत खराब थी तो तेल कंपनी और उसके संबंधित देश ने इराक से तेल उठाव करने की योजना क्यों बनाए।