द फॉलोअप डेस्क
पटना के गोपालपुर थाना क्षेत्र में करीब दो बीघा जमीन को लेकर ओमप्रकाश यादव और जितेंद्र कुमार के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। देखते ही देखते मामला गोलीबारी तक पहुंच गया।स्थानीय लोगों के अनुसार, दो दिन पहले भी दोनों गुटों के बीच कहासुनी और हल्की मारपीट हुई थी, लेकिन उस समय मामला किसी तरह शांत करा दिया गया था। इसके अगले दिन, सोमवार को बादशाही पइन के पास एक बार फिर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। पहले कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते लाठी-डंडों की मारपीट में बदल गई। कुछ ही देर में हालात बेकाबू हो गए और अचानक गोलीबारी शुरू हो गई।
इसी दौरान रानीपुर पैजाबा के पास, जो बाइपास थाना और गोपालपुर की सीमा पर स्थित है, पहले से घात लगाए बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इस गोलीबारी में अगमकुआं तुलसी मंडी निवासी, महारानी होटल के संचालक सह राष्ट्रीय सदाबहार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश यादव के जांघ और पैर में गोली लगी, जबकि उनके सहयोगी जितेंद्र साह के पेट को छूते हुए गोली निकल गई।गोलीबारी के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और हमलावर फायरिंग करते हुए फरार हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से दोनों घायलों को तुरंत नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, दोनों की स्थिति फिलहाल स्थिर है, लेकिन उन्हें निगरानी में रखा गया है।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने पूरे इलाके को घेरकर जांच शुरू कर दी है। साथ ही एफएसएल टीम को भी बुलाया गया, जिसने घटनास्थल से सबूत जुटाए हैं। पुलिस को मौके से कुछ अहम सुराग भी मिले हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। अस्पताल पहुंचे सदर डीएसपी-2 रंजन कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला पूरी तरह जमीन विवाद से जुड़ा प्रतीत हो रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से तनाव चल रहा था और दो दिन पहले ही इस मामले में गोपालपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। ऐसे में इस घटना को पूर्व नियोजित साजिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। पुलिस फिलहाल यह तय करने में जुटी है कि मामला गोपालपुर थाना में दर्ज होगा या बाइपास थाना में। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हमलावरों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।इस वारदात ने एक बार फिर पटना में कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं जमीन विवादों को लेकर बढ़ती हिंसा ने प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है।