गांधीनगर
गुजरात के गांधीनगर जिले के डाहेगाम में वन विभाग और स्थानीय लोगों के संयुक्त प्रयास से, बंदर के एक नन्हे बच्चे को तांबे के बर्तन से सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया गया। बंदर का सिर बर्तन में इस कदर फंस गया था कि उसे निकालने के लिए तीन दिनों तक रेस्क्यू अभियान चलाना पड़ा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस घटना का वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे नीचे देखा जा सकता है।
ગાંધીનગરના દહેગામમાં તાંબાના લોટામાં મોં ફસાઈ ગયેલા વાંદરાના બચ્ચાને બચાવવા વન વિભાગ અને સ્થાનિકોએ સતત ત્રણ દિવસ રેસ્ક્યુ ઓપરેશન ચલાવ્યું હતું.
— Dixit Soni (@DixitGujarat) May 25, 2026
આખરે રવિવારે ભારે સિફતપૂર્વક લોટો કાપીને બચ્ચાને સુરક્ષિત મુક્ત કરાતા તે તેની માતાને વળગી પડ્યું હતું અને માનવતાનું ઉત્તમ ઉદાહરણ પૂરું… pic.twitter.com/0cGBlmEq6J
रेस्क्यू की चुनौती
घटना के अनुसार, बंदर का यह छोटा बच्चा किसी तरह तांबे के बर्तन में अपना सिर डाल देने के कारण फंस गया था। बर्तन का मुंह इतना छोटा था कि वह न तो अपना सिर निकाल पा रहा था और न ही ठीक से सांस ले पा रहा था। जब स्थानीय लोगों की नजर इस बेबस बच्चे पर पड़ी, तो उन्होंने तुरंत वन विभाग को इसकी सूचना दी। वन अधिकारी मौके पर पहुंचे और मासूम को बिना कोई नुकसान पहुंचाए सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिशों में जुट गए।

सावधानी से काटा गया बर्तन
रेस्क्यू टीम ने विशेष कटर और आधुनिक उपकरणों की मदद से तांबे के बर्तन को धीरे-धीरे काटना शुरू किया। पूरे अभियान के दौरान इस बात का पूरा ध्यान रखा गया कि बच्चा शांत रहे और उसे कोई चोट न लगे। वीडियो फुटेज में देखा जा सकता है कि टीम के सदस्य जमीन पर बैठकर कितनी बारीकी और धैर्य से काम कर रहे हैं। लगभग तीन दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार बर्तन को सुरक्षित तरीके से काटकर बच्चे को आजाद करा लिया गया।

मां से मिलन और भावुक पल
जैसे ही बंदर के बच्चे को बर्तन से बाहर निकाला गया, वह तुरंत दौड़कर अपनी मां के पास पहुंचा और उसकी गोद से लिपट गया। मां-बेटे के मिलन का यह भावूक दृश्य देखकर वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं। राहत की बात यह है कि बच्चे की स्थिति अब बिल्कुल ठीक है और उसे कोई गंभीर चोट नहीं आई है। वन विभाग के अधिकारियों ने स्थानीय लोगों की तत्परता और मदद की सराहना करते हुए कहा कि वन्यजीव संरक्षण में सामुदायिक सहयोग बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।