द फॉलोअप डेस्क:
बिहार (Bihar) के मुंगेर जिले के धरहरा प्रखंड स्थित कुमारपुर गांव (Kumarpur village) के सचिन कुमार (Sachin Kumar) ने अपनी मेहनत से सफलता की नई कहानी लिखी है। जिस उम्र में युवा अपने करियर (Career) की शुरुआत के लिए परिवार के सहारे की उम्मीद करते हैं, उस वक्त सचिन पर घर की जिम्मेदारी आ गई थी। पिता की गंभीर बीमारी के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई, जिसके बाद उन्होंने साइकिल मरम्मत की दुकान संभालकर घर चलाने में योगदान दिया। मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को पीछे नहीं छूटने दिया और रेलवे में नौकरी पाने का लक्ष्य बनाए रखा।

साइकिल दुकान पर काम करते हुए की परीक्षा की तैयारी
सचिन ने मुंगेर के घटवारी स्थित डीपी यादव उच्च विद्यालय से शुरुआती शिक्षा हासिल की। आर्थिक तंगी के कारण उनके लिए बड़े शहर में जाकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना संभव नहीं था। ऐसे में उन्होंने गांव में रहकर ही ऑनलाइन कक्षाओं और किताबों की मदद से पढ़ाई जारी रखी। करीब 10 वर्षों तक साइकिल की दुकान पर काम करते हुए उन्होंने पढ़ाई के लिए समय निकाला। दुकान पर ग्राहकों के बीच मिलने वाले खाली समय का इस्तेमाल भी वह परीक्षा की तैयारी में करते थे। काम और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाकर उन्होंने अपने लक्ष्य की ओर लगातार कदम बढ़ाए।

25 साल की उम्र में बने असिस्टेंट लोको पायलट
सचिन कुमार की मेहनत आखिरकार रंग लाई और 25 वर्ष की उम्र में उनका चयन भारतीय रेलवे में सहायक लोको पायलट (एएलपी) के पद पर हो गया। अब उनकी पदस्थापना भुवनेश्वर रेल मंडल में हुई है, जहां वह ट्रेनों के परिचालन से जुड़ी जिम्मेदारी निभाएंगे। साइकिल की दुकान से रेलवे तक पहुंचने का उनका सफर बताता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद निरंतर मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण से आगे बढ़ा जा सकता है। सचिन की उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक चुनौतियों के बीच अपने भविष्य को बेहतर बनाने का सपना देखते हैं।